तालिबान का ये फरमान सुन छलक पड़े न्यूज़ एंकरों के आंसू, 84 फीसदी महिला पत्रकारों की छूटी नौकरी

Spread the love

Women Journalists in Taliban: अफगानिस्तान में तालिबानी के कब्जे के बाद वहां आए दिन नए-नए फरमान जारी किए जा रहे हैं. इन तालिबानी फरमानों से खासतौर से वहां की महिलाएं और बच्चे सहमे हुए हैं. हालांकि तालिबान सरकार के गठन के दौरान ये वादा किया गया था कि ये नई अफगान सरकार महिलाओं के खिलाफ पूर्वाग्रहों या हिंसक बर्तावों से बचकर फैसले लेगी लेकिन चंद महीनों में ही तालिबान के अंतरिम प्रशासन ने महिलाओं के खिलाफ (Women Journalists in Taliban) एक बाद एक कई फरमान जारी कर दिए. इनमें महिलाओं को सबसे बुनियादी अधिकारों जैसे शिक्षा और रोज़गार से भी अलग-थलग किया जाने लगा है.

वहीं अफगानिस्तान की इस नई तालिबानी सरकार में महिला पत्रकारों और टीवी रिपोर्टरों (Women Journalists in Taliban) को भी इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है. तालिबान के इस भेदभाव भरे रवैये के चलते कई महिला पत्रकार नौकरी छोड़ने या अपना प्रोफेशन बदलने को मजबूर हो गई है. देश दुनिया के जाने-माने थिंक टैंक ऑबजर्वर रिसर्च फाउंडेशन में छपे एक लेख के मुताबिक, एक लंबे अर्से तक अफगानिस्तान का मीडिया स्वतंत्र रूप से और मजबूती के साथ अपना काम करता रहा था. पिछले कुछ अर्सों में तालिबान ने इस्लामिक कानून की कट्टरवादी व्याख्या का हवाला देते हुए महिलाओं के प्रेस से जुड़े अधिकारों, अभिव्यक्ति की आज़ादी और व्यक्तिगत स्वायत्तता को काफी हद तक कुचल कर रख दिया है.

बेटी का पैर लेकर थाने पहुंचा पिता,बोला-ससुराल वालों ने जला कर मार डाला

महिला क्षेत्रीय नेटवर्क में भारत की कंट्री कोऑर्डिनेटर आकांक्षा खुल्लर के इस लेख के मुताबिक, अगस्त 2021 के बाद से 84 फ़ीसदी महिला पत्रकार और मीडियाकर्मी अपनी नौकरियों से हाथ धो चुके थे. मार्च 2022 में अफगान नेशनल जर्नलिस्ट्स यूनियन द्वारा किए गए एक और सर्वे के अनुसार 79 फ़ीसदी अफगानी महिला पत्रकारों ने नई तालिबानी हुकूमत के तहत अपमानित होने और धमकियां मिलने का दावा किया. इनमें तालिबानी प्रतिनिधियों द्वारा दी गई शारीरिक और मौखिक प्रताड़ना शामिल हैं. तालिबानी हुकुमत के बाद महिला टीवी कर्मचारियों ने तालिबानी हुक्मरानों द्वारा “काली सूची में डाले जाने” का भी ज़िक्र किया है.

अकांक्षा खुल्लर लिखती हैं, तालिबान ने ये आदेश भी दिया है कि अपने घरों से 45 मील से ज़्यादा का सफ़र तय करने के लिए महिलाओं को एक पुरुष अभिभावक को साथ रखना होगा. लिहाज़ा महिला रिपोर्टरों के लिए दूरदराज़ के इलाक़ों में ज़मीन पर जाकर रिपोर्टिंग और न्यूज़ कवरेज करना मुश्किल हो गया. इन तमाम फ़रमानों को मिलाकर देखें तो अफगानिस्तान में महिला पत्रकारों (Women Journalists in Taliban) के लिए अपना काम करने के रास्ते की चुनौतियां बढ़ती ही जा रही हैं. दूसरी ओर तालिबान अपनी सख़्तियों में किसी तरह की नरमी लाने के संकेत नहीं दे रहा है.

आरिफ मोहम्मद खान क्यों बन सकते हैं देश के अगले राष्ट्रपति? जानिए…

वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीती 21 मई से महिला टीवी कर्मचारियों और एंकरों के लिए न्यूज ब्रॉडक्रास्टिंग के दौरान चेहरा ढकना अब जरूरी नियम बना दिया गया है. हालांकि कुछ महिला एंकरों ने इस तालिबानी फरमान विरोध किया लेकिन मीडिया कंपनियों पर बढ़ते तालिबानी दबाव के बाद अभ महिला एंकर अपना चेहरा ढककर समाचार पढ़ती नज़र आने लगीं हैं.

Ground Report के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@Gmail.Com पर मेल कर सकते हैं।

Leave a Comment