Afreen Fatima house demolition : आफरीन फात्मा का मकान तोड़कर फंस गई योगी सरकार ?

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Afreen Fatima house demolition : उत्तर प्रदेश में योगी सरकार का बुलडोज़र रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हालही में पैगंबर मोहम्मद पर एक टिप्पणी को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में शामिल लोगों के घरों को योगी सरकार गिरवा रही है। प्रयागराज में प्रदर्शन (Violence in Prayagraj) को दौरान भड़की हिंसा के बाद पुलिस ने जावेद मोहम्मद (Javed Mohammad) नाम के शख्स को हिंसा का मास्टरमाइंड बताकर उनके मकान पर बुलडोज़र चलवा दिया ।

प्रयागराज में 10 जून को हुई हिंसा के बाद पुलिस ने वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया (Welfare Party of India) से जुड़े जावेद मोहम्मद को इस हिंसा का मुख्य आरोपी बताकर गिरफ्तार किया। पुलिस का आरोप है कि प्रयागराज में 10 जून को नमाज़ बाद हुए हिंसा में जावेद मोहम्मद (Javed Mohammad) मुख्य साजिशकर्ता है। 12 जून को भारी पुलिस बल के साथ अधिकारी उनके आवास पर पहुंचे और मकान को अवैध बताकर ज़मीदोश कर दिया। पूरे घर को पत्थर के ढेर में बदल दिया।

जावेद मोहम्मद (Javed Mohammad) के घर से निकले अवैध हथियार

जावेद मोहम्मद का घर गिरने के बाद प्रयागराज के SSP अजय कुमार ने मीडिया को बताया कि मकान गिराने से पहले मकान की तलाशी के वक्त आरोपी के घर से एख 12 बोर का तमंचा,315 बोर का तमंचा और कई कारतूस बरामद हुए हैं। हालांकि घर से निकले इन सामानों को पुलिस ने मीडिया के सामने नहीं दिखाया।

प्रयागराज के DM संजय खत्री ने मकान गिराने की कार्रवाई पर मीडिया से बात करते हुए बताया कि प्रशासन ने सभी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए ही मकान गिराया है। हमने नोटिस भी जारी किया था। जल्द ही हम हिंसा में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई करने जा रहे हैं। कोई भी अपराधी बचकर नहीं जा पाएगा। नियम-क़ानून के तहत सख्त एक्शन लिया जाएगा।

प्रयागराज हिंसा में मुख्य आरोपी बनाए गए जावेद मोहम्मद की बेटी सुमैया फात्मा ने मीडिया से बात कर कहा- मेरे पापा को ग़लत फंसाया जा रहा है। आजतक उनका ऐसे किसी मामले में नाम तक नहीं आया है। वो हमेशा प्रशासन का सहयोग करते आए हैं। पुलिस प्रशासन ने बिना किसी सबूत के उन्हें हिंसा का मास्टरमाइंड बताकर (Afreen Fatima house demolition) हमारा घर तोड़ डाला।

अधिवक्ता मंच ने प्रशासन की इस कार्रवाई को ग़ैर क़ानूनी बताया

जावेद मोहम्मद का मकान गिराए जान के बाद हर ओर से इस कार्रवाई को ग़लत बताया गया। अधिवक्ता मंच से जुड़े हाईकोर्ट के वकीलों ने इलाहबाद हाई कोर्ट में इस संबंध में एक याचिका दाखिल कर दी है। इलाहबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजे इस पत्र याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रयागराज प्रशासन ने उस मकान को तोड़ है। जो जावेद मोहम्मद नाम पर है ही नहीं।

वकीलों का कहना है कि उनकी पत्नी का है जिन्हें वह घर अपने पिता से तोहफे के रूप में मिला था। (Afreen Fatima house demolition) वकीलों ने अदालत से मांग की है कि प्रशासन को मकान के पुनर्निर्माण का आदेश दे और परिवार को करोड़ों का मुआवजा दिया जाए। साथ ही इस ग़ैर क़ानूनी काम में लिप्त अधिकारियों को सज़ा भी दी जाने की मांग की है।

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