आरिफ मोहम्मद खान क्यों बन सकते हैं देश के अगले राष्ट्रपति? जानिए…

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सोशल मीडिया पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का नाम ट्रेंड कर रहा है। चर्चा है कि देश के अगले राष्ट्रपति के तौर पर आरिफ खान का नाम सबसे आगे है। मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है। जिसके चलते आरिफ खान का नाम सबसे ऊपर बताया जा रहा है।

निवर्चान आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। 18 जुलाई को वोटिंग और 21 जुलाई को इसके नतीजे आएंगे। वर्तमान में देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को ख़त्म हो जाएगा।

ऐसे में हर कोई देश के अगले राष्ट्रपति को लेकर कयास लगा रहा है। सोशल मीडिया पर यह सवाल लगातार घूम रहा कि अगला राष्ट्रपति कौन होगा? इसी बीच एक नाम को लेकर काफी हल्ला मचा हुआ है। वो नाम है केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का। जो लगतार सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है।

आरिफ मोहम्मद खान के पर ही क्यों लग रहे कयास ?

ऐसे माना जा रहा है कि वर्तमान समय में भाजपा के पास सबसे संतुलित चेहरा आरिफ मोहम्मद खान ही हैं। दरअसल इसका मुख्य कारण ये भी हो सकता है कि पिछले कुछ सालों से भाजपा पर मुस्लिमों को लेकर जिस तरह के आरोप लगते आए हैं, भाजपा उसके जवाब के तौर पर आरिख मोहम्मद के नाम पर विचार कर सकती है। आरिफ मोहम्मद कई मौकों पर नरेंद्र मोदी सरकार और आरएसएस की नीतियों की तारीफ भी करते रहे हैं।

हालही में पैगंबर मोहम्मद वाले मामले पर जिस प्रकार से अरब देशों की नाराज़गी सामने आई। भाजपा आरिफ मोहम्मद खान के सहारे दुनिया को एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश करेगी।

सोशल मीडिया पर लोग मोदी सरकार को आरिफ खान को देश का अगला राष्ट्रपति बनाने के लिए सलाह देने में जुटे हैं। तमाम यूज़र्स उनकी तुलना डॉ एपीजे अब्दुल कलाम से करते नज़र आ रहे हैं। इसी के चलते लोग कयास लगा रहे हैं कि मोदी सरकार उनके नाम पर फैसला कर सकती है।

कौन हैं आरिफ मोहम्मद खान ?

आरिफ मोहम्मद खान वर्तमान में केरल के राज्यपाल हैं। उनको खुलकर अपनी राय रखने के लिए जाना जाता है। ख़ासकर अल्पसंख्कों के जुड़े मामलों पर वो अपनी खुलकर बात रखते नज़र आते हैं। पैगंबर वाले मामले में उन्होंने क़तर द्वारा भारत से माफी वाली मांग को सिरे से खारिज करने की बात कह डाली थी। साथ ही उन्होंने कहा कि लोग आरएसएस और प्रधानमंत्री मोदी की ओर ध्यान दें।

राज्यपाल आरिफ खान का एक लंबा राजनीतिक सफर रहा है। उनको अनुभवी सियासी लीडरों में गिना जाता है। वो बड़े स्कॉलर हैं और देश में तीन तलाक को समाप्त करने वालों में सबसे मुखर चेहरा रहे हैं। सबसे चर्चित मामलों में से एक शाह बानो वाले प्रकरण में सरकार की कार्रवाई से असहमत होने के बाद 1986 में राजीव गांधी सरकार में अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

आरिफ मोहम्मद खान उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के स्याना तहसील के बारीजोत गांव के मूल निवासी हैं। वो 1980 के दशक में कांग्रेस के टिकट से पहली बार कानपुर से लोकसभा चुनाव जीता था।

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में 1951 में जन्मे आरिफ मोहम्मद खान का परिवार बाराबस्ती से ताल्लुक रखता था। शुरुआती जीवन यहां बिताने के बाद आरिफ मोहम्मद खान ने दिल्ली के जामिया मिलिया स्कूल से शिक्षा प्राप्त की। उसके बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और लखनऊ के शिया कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की। साथ ही छात्र जीवन से ही राजनीति में भी उतर गए थे।

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