किसी आरोपी के मकान को गिराना सही या ग़लत ? पूर्व जजों ने दिया जवाब; पढ़ें

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House demolition : देश के कई राज्यों में इस वक्त बुलडोज़र राजनीति चर्म पर है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में इसका उपयोग अधिक होता दिख रहा है। कानपुर में हुए विकास दुबे कांड के बाद से बुलडोज़र राजनीति की शुरूआत हो गई। वर्तमान में यूपी में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद योगी सरकार आरोपियों के मकानों पर बुलडोज़र (House demolition) चलवा रही है। लोग इसको क़ानून की हत्या बता रहे। किसी आरोपी का घर गिराना कितना सही है या ग़लत है। क़ानून इस बारे में क्या कहता है। आइये जानते हैं।

क़ानून की नज़र में किसी आरोपी का घर गिराना (House demolition) कितना सही है?

बुलडोज़र से आरोपी का मकान गिराने को लेकर पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया आर एम लोधा (Former chief justice rm lodha) ने इस पर बेहद आसान भाषा में खुलकर बताया है। उन्होंने बताया कि किसी घर को गिराने से पहले क़ानून की एक पूरी प्रक्रिया का पालन सबसे ज़रूरी बिंदू है। किसी व्यक्ति ने कोई अपराध किया है। तो सीधे उसका घर गिरा देना किसी भी नज़रिए से सही नहीं है। अगर उस शख्स की संपत्ति पर किसी तरह का कोई विवाद चल रहा है। तो ऐसी स्थिति में कोर्ट से ऑडर लाना होता है। उसे नोटिस देकर पर्याप्त समय दिया जाता है।

जस्टिस ऑफ इंडिया आर एम लोधा आगे बताते हैं। अगर किसी व्यक्ति ने कोई गंभीर अपराध भी किया है। उस स्थिति में भी सरकार को ये अधिकार नहीं है कि उसका घर तोड़ दे। अपराध हुआ है या नहीं। अगर हुआ है तो सज़ा तय करना कोर्ट का काम है। सरकार अगर खुद फैसले लेकर किसी आरोपी को अपराधी मानकर उसका घर गिरा देती। तो ये क़ानून की नज़र में ग़लत है।

किसी शख्स पर महज़ आरोप लगने से उसका मकान गिराना ग़लत

इसी मामले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज गोविंद माथुर (Former Chief justice govind mathur) भी ऐसा ही मानते हैं। उनका भी यही कहना है कि किसी आरोपी के खिलाफ कानून के मुताबिक ही कोई कार्रवाई की जा सकती है। जब तक उसपर कोई जुर्म साबित नहीं हो जाता। तब तक ऐसी कार्रवाई करना क़ानून का अपमान करने जैसा है। जज गोविंद माथुर कहते हैं। अगर कोई शख्स आरोपी है तो उसके खिलाफ CRPC के तहत या फिर IPC के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन जब तक आरोपी का जुर्म साबित नहीं हो जाता, तब तक उसपर ऐसी कार्रवाई करना बिलकुल ग़लत है।

आरोपियों के मकान गिराए जाने की कार्रवाई पर एक और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज चेलमेश्वर (former justice chelameswar) ने भी अपनी बात रखी। वो कहते है कि कोई व्यक्ति केवल आरोपी है और उसकी संपत्ति पर बुलडोज़र चला दिया जाए। तो ये सरासर ग़लत है। क़ानून की एक लंबी प्रक्रिया होती है। उसका पालन किय बिना अगर ऐसा किया जा रहा है। तब ये तनाशाही जैसा होगा। महज़ आरोप लगने या शिकायत होने पर मकान नहीं गिराया जा सकता है। अगर इस तरह की कार्रवाई करनी है तो पहले नगर पालिका को पूरी क़ानूनी प्रक्रिया को समझना होगा।

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