कानपुर : जब हिंसा में दोनों समुदाय लिप्त, तो गिरफ़्तारी केवल मुस्लिमों की क्यों?

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कानपुर हिंसा : उत्तर प्रदेश का कानपुर शहर बीते 3 जून को हिंसा की चपेट में आ गया। मुस्लिम समुदाय द्वारा बंद के आह्वान के बाद शुक्रवार को नमाज़ बाद लोग प्रदर्शन करने लगे। तभी दो समुदाय आमने-सामने आ गए। जमकर पत्थरबाज़ी हुई। लोग भाजपा नेता नुपूर शर्मा के उस बयान का विरोध करते हुए गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। जिसमें उन्होंने पैगंबर मोहम्मद को लेकर एक टीवी डिबेट के दौरान आपत्तिजनक शब्द कह दिए थे।

हिंसा के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर अब हर तरफ सवाल उठ रहे हैं। लोग पुलिस को एकतरफा एक्शन लेने पर घेरते नज़र आ रहे हैं। शहर काज़ी अब्दुल कुद्दूस का कहना है कि पुलिस केवल मुस्लिम समुदाय के लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज रही है। जबकि हिंसा में दोनो समुदाए बराबर से शामिल हैं। पत्थरबाज़ी दोनो ओर से की गई है। पुलिस ने दर्जनों बेगुनाह लड़कों को पकड़कर जेल भेज दिया। इस एकतरफा कार्रवाई को लेकर लोग खासा नाराज़ हैं।

बेकनगंज बाज़ार में दुकान चलाने वाले मोहम्मद का आरोप है कि उनके बेटे आकिब को पुलिस ने उठा लिया। पिता का कहना है कि उनका बेटा हिंसा में नहीं शामिल है। वह बेगुनाह है। पुलिस उसको जबरन उठाकर लेगई है।

https://twitter.com/ZakirAliTyagi/status/1534749837349908481

कानपुर हिंसा : क्या पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही ?

हिंसा के बाद पुलिस कार्रवाई को देखें तो ऐसा प्रतीत होता भी है कि पुलिस एकतरफा कार्रवाई कर रही है। क्योंकि तमाम ऐसे वीडियोज़-फोटोज़ मौजूद हैं जिसमें साफ देखा जा सकता है कि दूसरे समुदाय को लोग भी हिंसा में बराबर से लिप्त हैं। घरों से पत्थरबाज़ी कर रहे हैं। मुस्लिम समुदाए का कहना है कि पुलिस भाजपा नेताओं के कहने पर ही काम कर रही है। पुलिस पर नेता दबाव बना रहे है कि वे हिंदू समुदाय के लोगों की गिरफ्तारी न करें।

सोशल मीडिया पर लोग उन वीडियोज़ को शेयर कर पुलिस से गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। वहीं पुलिस ने उल्टा उन वीडियोज़ को सोशल मीडिया शेयर करने वालों पर मुक़दमा दर्ज कर लिया।  MILLAT TIMES के पत्रकार शम्स तबरेज़ पर पुलिस ने कानपुर हिंसा वीडियो ट्विट करने के चलते उनपर केस दर्ज कर लिया।

पुलिस ने अबतर 54 लोगों को गिरफ्तार किया है। जिसमें केवल 4 लोग ही दूसरे समुदाय से हैं। जबकि 50 लोग मुस्लिम समुदाय के हैं। उसके साथ ही लगातार गिरफ्तारियां जारी हैं। पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के पोस्टर चिपका दिए। जिसमें 40 मुस्लिम लड़कों को हिंसा में लिप्त बताते हुए गिरफ्तारी का आदेश दिया है। 500 से अधिक अज्ञात लोगों पर केस दर्ज है।

भीड़ जिस लड़के को पीट रही है। पुलिस ने उसे ही हिंसा में लिप्त बताकर जेल भेज दिया।

द वायर ने उन परिवारों से बात कि जिनका आरोप है कि पुलिस उनके बेगुनाह लड़को को जबरन उठाकर ले गई और जेल में डाल दिया। एक नाबालिग लड़के हासिब को पुलिस ने जेल भेज दिया। उसकी बहन शैला ने दवायर से बात करते हुए बताया कि उसका भाई BA फाइनल ईयर के छात्र है। पुलिस की मौज़ूदगी में बजरंग दल के लोगों ने इतनी बेरहमी से पीटा की उसके मुंह से ख़ून आ गया,पुलिस उसे इलाज कराने के नाम पर ले गई लेकिन फ़र्ज़ी केस लगा जेल भेज दिया है।

क्षेत्रिए लोगों का आरोप है कि पुलिस किसी भी लड़के को आरोपी बताकर उठा ले जा रही। पुलिस ने कई लड़को को महज़ इस लिए पकड़कर जेल भेज दिया क्योंकि उनके मोबाइल में प्रदर्शन से जुड़े वीडियो मौजूद थे।

पुलिस की इस एकतरफा कार्रवाई से मुस्लिम समुदाय में रोष है। इस संबंध में समाजवादी के तीन विधायकों ने कानपुर कमिश्नरेट से मुलाकात कर बेगुनाह लोगों को छोड़ने की अपील की है साथ ही बेगुनाहों को छोड़ने को लेकर ज्ञापन सौंपा है।

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