भाजपा के वो नेता जिनका है हेट स्पीच से गहरा नाता

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नुपुर शर्मा के पैगम्मर मोहम्मद साहब पर आपत्तीजनक बयान के बाद मुस्लिम देशों ने जिस तरह भारत सरकार की आलोचना की है उसके बाद से सरकार और भाजपा बैकफुट पर है। उन नेताओं की लिस्ट बनाई गई है जो अक्सर भड़काउ (Hate Speech Leaders) बयान देते हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें सख्त हिदायत दी गई है कि किसी भी तरह के धार्मिक कमेंट करने से बचा जाए। कई नेता जैसे तेजिंदर बग्गा ने अपने कई पुराने ट्वीट डिलीट करना शुरु कर दिया है, उन्हें डर है कि नुपुर शर्मा की ही तरह पार्टी उनपर भी कभी भी कार्रवाई कर सकती है।

कौन हैं भाजपा के वो नेता जिन्हें दी गई है संभल कर बयान देने की हिदायत?

अनंत कुमार हेगड़े, शोभा करंदलाजे, गिरिराज सिंह, तथागत राय, प्रताप सिम्हा, विनय कटियार, महेश शर्मा, टी. राजा सिंह, विक्रम सिंह सैनी, साक्षी महाराज, संगीत सोम, कपिल मिश्रा और प्रज्ञा ठाकुर जैसे नेता विवादित बयान (Hate Speech Leaders) देते रहे हैं।

आईये समझते हैं कि आखिर क्यों भाजपा में पहले जिन भड़काउ बयान देने वाले नेताओं को प्रमोशन मिलता था, अब उनपर (Hate Speech Leaders) सस्पेंशन की तलवार क्यों लटकने लगी है।

देश में भाजपा ने सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाले नेताओं को खूब शह दी है। एक ट्रेंड बना की जो जितना मुसलमानों के खिलाफ भड़काएगा, उसे उतना ही बड़ा पद मिलेगा। चाहे फिर वो विवादित बयान देकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचना हो चाहे कार्यकर्ता से सीधे बड़े पद पर पहुंचना हो। भाजपा में हमेशा एक ही फॉर्मूला चला हेट स्पीच का।

दिल्ली के चुनावों में जी भर कर हेट स्पीच दी गई। चुनावी सभाओं में गोली मारो के नारे लगाने वाले नेताओं को मंत्री और सांसद बना दिया गया। दिल्ली भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने तो सोशल मीडिया पर पूरा का पूरा हेट स्पीच एंपायर ही खड़ा कर दिया। लेकिन पार्टी की तरफ से किसी पर भी कार्रवाई नहीं की गई। बल्कि उन नेताओं को कानून और जेल से बचाने के लिए एड़ी चोटी का दम लगा दिया गया।

नेताओं को लगने लगा कि भाजपा में जल्दी आगे बढ़ना है तो ऊलजलूल गैरज़रुरी बयान दो। चाहे इसके लिए देश की सद्भावना को ही क्यों न घाव होने लगे। भाजपा में मोदी युग के इस ट्रेंड ने समाज में इस कदर नफरत फैलाई है कि अब स्थिति काबू से बाहर जाती दिखने लगी है।

नुपुर शर्मा ने जिस तरह का बयान दिया वो न सिर्फ भड़काऊ था, बल्कि गैरज़रुरी भी था। मुस्लिम देशों में भारत का विरोध सिर्फ इसी बयान को लेकर नहीं है। उनका कहना है कि भारत में मुस्लिमों के खिलाफ महौल बनाया जा रहा है। यह कड़ी प्रतिक्रिया अब तक हुई सभी इस्लामोफोबिक घटनाओं के चरम पर पहुंच जाने के बाद आई है।

इस बात को कतई नहीं नकारा जा सकता की भारत में मुसलमानों की तरफ से भी कई बार हिंदू धर्म पर बेहद ही (Hate Speech Leaders) आपत्तीजनक टिप्पणियां की गई। सरकार और कानून को चाहिए कि वह ऐसे सभी लोगों पर कार्रवाई करे जो सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश करे। एकतरफ कार्वाई और दूसरी तरफ बढ़ावे की मंशा की वजह से भारत सरकार को आज दूसरे देशों को जवाब देना पड़ रहा है।

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