मुख्तार अब्बास नकवी : इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से दिल्ली की सियासत तक; पढ़ें कुछ दिलचस्प किस्से  

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भारतीय जनता पार्टी का केंद्र में एक मात्र मुस्लिम चेहरा और केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी (Mukhtar Abbas Naqvi) ने अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। केंद्र में भाजपा के पास अब कोई दूसरा मुस्लिम MP नहीं बचा। मुख्तार अब्बास एकमात्र चेहरा थे। बीजेपी के तीन मुस्लिम MPs थे- नकवी, एमजे अकबर और सैयद जफर इस्‍लाम। बाकी दोनों के कार्यकाल पहले ही खत्‍म हो चुके थे।

नकवी के राज्‍यसभा कार्यकाल के साथ संसद में बीजेपी का मुस्लिम प्रतिनिधित्‍व खत्‍म हो गया। चर्चा है कि उनको कोई बड़ी ज़िम्मेदारी मिल सकती है। उनका नाम उपराष्ट्रपति पद की रेस में चल रहा है। चर्चा यह भी है कि उन्हें राज्यपाल बनाया जा सकता है।

मुख़्तार अब्बास नकवी बीजेपी के चुनिंदा मुस्लिम नेताओं में से हैं जिन्‍हें पार्टी ने तीन बार राज्यसभा सांसद बनाया। मुख्तार अब्बास नकवी नरेंद्र मोदी सरकार 2.0 का इकलौता मुस्लिम चेहरा थे। नकवी केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय संभाल रहे थे। उनके इस्तीफा देने के बाद स्मृति ईरानी को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है। वो वर्तमान में केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री के रूप में कार्यभरा देख रही हैं।

मुख़्तार अब्बास नकवी 17 साल की उम्र में जेल गए

देश में जब आपातकाल लागू हुआ तो मुख्तार अब्बास नकवी महज़ 17 साल के थे। उनको मेंटेनेंस और इंटरनल सिक्‍योरिटी एक्‍ट (MISA) के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। वो इलाहाबाद की नैनी जेल में बंद रहे। शुरूआती दौर में नकवी भारतीय जनता पार्टी की यूथ ब्रिगेड का हिस्‍सा रहे। उन्होंने जेपी आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर हिस्‍सा लिया।

मुख्तार अब्बास नकवी ने बीजेपी टिकट पर (1991, 1993) में दो विधानसभा चुनाव लड़े। ये जानकारी अल्‍पसंख्‍यक मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट पर नकवी की प्रोफाइल में मौजूद है। नकवी ने राज नारायण के नेतृत्‍व वाली जनता पार्टी (सेक्‍युलर) के टिकट पर 1980 में इलाहाबाद वेस्‍ट से चुनाव लड़ा। इसके बाद उन्होंने 1989 में उन्‍होंने निर्दलीय उम्‍मीदवार के रूप में अयोध्‍या से चुनावी मैदान में उतरे।

दिल्ली की सत्ता पर 2014 में नरेंद्र मोदी के क़ाबिज़ होने के बाद नकवी को 15 साल बाद केंद्र का चेहरा बनाया गया। पीएम मोदी ने उन्‍हें अल्‍पसंख्‍यक मामलों के मंत्रालय में राज्‍य मंत्री बना दिया। इसके साथ ही संसदीय मामलों के मंत्रालय का भी जिम्‍मा उनके पास पास रहा। भाजपा लंबे समय तक नकवी का इस्‍तेमाल मुस्लिम चेहरे को रूप में करती रही। नजमा हेपतुल्‍ला के इस्‍तीफे के बाद 2016 में नकवी को अल्‍पसंख्‍यक मामलों के मंत्रालय का स्‍वतंत्र प्रभार सौंप दिया गया।  मोदी 2.0 में भी नकवी का मंत्रालय बरकरार रखा गया।

जब सीमा से शादी के लिय ज़िद पर अड़ गए नकवी

मुख्तार अब्बास नकवी आज से 4 दशक पहले जब इलाहाबाद यूनिवर्सिटी (अब प्रयागराज) में छात्र के तौर पर पढ़ रहे थे। तब उनकी दोस्ती सीमा से हुई। धीरे-धीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ गया। नकवी सीमा के शादी करने की ज़िद पर अड़े थे। सीमा के घर वालों को रिश्ता मंज़ूर नहीं था। नकवी हर सूरत में सीमा से शादी करना चाहते थे। फिर अंत में सीमा का परिवार मान गया। जून 1983 में नकवी और सीमा की शादी होगई। पहले कोर्ट मैरिज, फिर निकाह और आख़िर मे सात फेरों के बाद शादी समाप्त हुई।

मोदी कैबिनेट के इस्तीफे के बाद अब अटकलें हैं कि उनको उपराष्ट्रपति बनाया जा सकता है।19 जुलाई तक उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर सकते हैं। 10 अगस्त को मौजूदा उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा हो रहा है। उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर अधिसूचना 5 जुलाई को जारी कर दी गई थी। छह अगस्त को चुनाव होना है। परिणाम भी इसी दिन घोषित होगा।

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