FATF की Grey List से Pakistan को बाहर लाने में किसका हाथ है?

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The Financial Action Task Force (FATF) ने पाकिस्तान को Grey List से हटा दिया है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय वॉचडॉग संस्था है जो मनी लॉंडरिंग और टेररिस्ट ऑर्गेनाईज़ेशन को फंडिंग करने वाले देशों पर नज़र रखती हैं और एक मॉनिटरिंग लिस्ट तैयार करती है जिससे बाकि देशों को पता रहता है कि किस देश के साथ वित्तीय लेनदेन जोखिम भरा हो सकता है। पाकिस्तान पिछले चार सालों से Grey List में है।

बर्लिन में चल रहे The Financial Action Task Force (FATF) प्लेनरी सेशन में यह तय किया गया कि पाकिस्तान को अब Grey List से बाहर कर दिया जाएगा। इस सेशन में International Monetary Fund (IMF), the United Nations, the World Bank, and the Egmont Group of Financial Intelligence Units शामिल रहे।

पाकिस्तान में अब राजनीतिक पार्टियों में Grey List से देश को बाहर लाने का श्रेय लेने की होड़ मची हुई है। आईये समझते हैं कि आखिर पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में पहुंचा कैसे और उसे बाहर लाने में किसका हाथ है।

कैसे पहुंचा पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट में?

पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय फंड की मनी लॉंड्री कर उसका टेरर फंडिंग में इस्तेमाल करने का आरोप था। यूएन द्वारा ब्लैकलिस्ट किये गए आतंकवादियों को पाकिस्तान अपने यहां पनाह दे रहा था और आसपास के देशों में आतंकवाद फैला रहा था। इस बारे में कई देशों ने यूएन में पाकिस्तान की शिकायत की थी। जून 2018 में पाकिस्तान को FATF ने ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। इसके बाद से लगातार पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गई।

कैसे होता है FATF Grey List में रहने का नुकसान?

दरअसल FATF में आईएमएफ, यूएन और वर्लड बैंक भी सदस्य होते हैं। इन जगहों से लोन लेने के लिए देशों को FATF की पॉलिसी पर खरा उतरना होता है। यानि जो देश ग्रे लिस्ट में होते हैं उन्हें अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से वित्तीय मदद मिलने में मुश्किल होती है। बुरे आर्थिक हालातों से जूझ रहे पाकिस्तान को अपनी छवि सुधारने के लिए एफएटीएफ की लिस्ट से बाहर आना ज़रुरी था।

पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट में बाहर आ जाने के बाद करीब 8 महीने के वक्त में FATF यह इंस्पेक्शन करेगा कि क्या सच में पाकिस्तान में अब टेरर फंडिंग रुक गई है? संतुष्ट होने के बाद ही सारे मैटर सैटल किए जाएंगे। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर लाने के लिए चीन और मित्र देश परदे के पीछे से काम कर रहे थे।

FATF Grey List में पाकिस्तान के चार साल, कैसे आया बाहर?

पाकिस्तान जून 2018 से ग्रे लिस्ट में है। चार साल बाद पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट से बाहर आने की मुख्य वजह 9 अप्रैल को आया लाहौर एंटी टेररिज़म कोर्ट का फैसला है जिसमें लश्कर ए तैयबा चीफ हाफिज़ सईद को 33 साल की कैद की सज़ा सुनाई गई थी।

पिछले प्लेनरी सेशन में FATF ने यह माना था कि पाकिस्तान ने 27 में से 26 टास्क पूरे कर लिए हैं। सिर्फ एक काम बाकि रह गया था, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान को यूएन द्वारा आतंकवादी ठहराए गए ऑर्गेनाईज़ेशन पर कार्रवाई करनी होगी ।

मनी लॉंडरिंग को लेकर भी 7 में से 6 टास्क पाकिस्तान ने पूरे कर लिये थे।

बर्लिन में हुए प्लेनरी सेशन के लिए फॉरेन मिनिस्ट्री ने प्रेसेंटेशन में यह बताया कि कैसे पाकिस्तान ने FATF द्वारा दिये गए 27 टास्क पर काम पूरा कर लिया है।

टेरर फंडिंग में लिप्त देशों को FATF ग्रे लिस्ट में डालती है और एक एक्शन प्लान बना कर देती है, जिसपर उन देशों को काम करना होता है। जब वो देश ये सभी टास्क कंप्लीट कर लेते हैं तो इंस्पेक्शन के बाद उन देशों को इस लिस्ट से बाहर कर दिया जाता है।

क्या इमरान खान को जाता है इसका श्रेय?

इमरान खान की पार्टी बता रही है कि कैसे उनकी सरकार ने पाकिस्तान को इससे बाहर लाने का पूरा काम किया है। अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पार्टी ने ट्वीट कर कहा कि मौजूदा सरकार इस काम का क्रेडिट लेना चाहेगी लेकिन हम आवाम को बता देना चाहते हैं कि इसके पीछे केवल और केवल इमरान खान की मेहनत है।

मार्च 2022 तक 23 देशों को इस लिस्ट में डाला गया था। इसमें पाकिस्तान के साथ-साथ सीरिया, तुर्की, म्यांमार, फिलिपींस, साउथ सुडान, युगांडा और यमन जैसे देश शामिल हैं।

वैसे तो इस लिस्ट में शामिल देशों पर कोई आर्थिक पाबंदियां नहीं होती। केवल बाकि देशों को ग्रे लिस्ट वाले देशों के बारे में आगाह किया जाता है। इससे देशों को काफी ज्यादा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है क्योंकि दूसरे देश किसी भी तरह की आर्थिक डील ग्रे लिस्ट वाले देशों से नहीं करते। पाकिस्तान की आर्थिक हालात वैसे भी काफी नाज़ुक है ऐसे में ग्रे लिस्ट से बाहर आने पर उसे थोड़ी राहत मिल जाएगी।

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