क्या देश में राष्ट्रपति चुनाव मुस्लिम बनाम मुस्लिम होने वाला है?

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President election : देश में राष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है। 18 जुलाई को उम्मीदवार चुनने के लिय वोटिंग की जाएगी। जल्द ही देश को उसका अगला राष्ट्रपति मिल जाएगा। राष्ट्रपति चुनावों में एनडीए के उम्मीदवार के खिलाफ विपक्ष अपना साझा उम्मीदवार उतारेगा। गोपाल कृष्ण गांधी और फारुख अब्दुल्ला सबसे आगे है।

कहा जा रहा है कि अगर पूरा विपक्ष किसी एक नाम पर सहमति बना ले तो शायद इस बार विपक्ष को उसका राष्ट्रपति मिल जाए। सत्तापक्ष की ओर से केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के नाम को लेकर चर्चा है। ख़बर है कि NDA की ओर से आरिफ मोहम्मद अगले राष्ट्रपति उम्मीवार के तौर पर उतारा जा सकता है। वहीं विपक्ष की ओर से दो डॉ फारुक अब्दुल्ला के नाम को लेकर ख़बर आ रही है।

अगर ऐसा होता है तो इस बार का राष्ट्रपति चुनाव बेहद ही दिलचस्प होगा। मोदी सरकार हमेशा से चौंकाने वाले फैसले लेने में ज़रा भी नहीं घबराती। कई मौके पर बीजेपी ऐसे फैसले करती आई है। अगर विपक्ष फारुक अब्दुल्ला को अपना राष्ट्रपति उम्मीदवार बना लेने में सहमत हो जाती और उधर बीजेपी आरिफ मोहम्मद खान को। तब ये चुनाव मुस्लिम राष्ट्रपति VS मुस्लिम राष्ट्रपति हो जाएगा।

ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्षी दलों की दिल्ली में हुई बैठक में तय किया गया कि विपक्ष 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में एनडीए के उम्मीदवार के खिलाफ अपना साझा उम्मीदवार उतारेगा। इसके लिए ममता बनर्जी ने गोपाल कृष्ण गांधी और फारुख अब्दुल्ला का नाम आगे किया है।

21 जून को ये दल एक बार फिर बैठक करेंगे और एक नाम पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। ममता बनर्जी ने कहा कि सभी दल एक ही उम्मीदवार का समर्थन करेंगे। सभी दलों ने यह तय किया है कि आगामी राष्ट्रपति चुनावों के लिए विपक्ष का एक साझा उम्मीदवार होगा। यह कैंडीडेट संविधान की रक्षा का काम करेगा और मोदी सरकार को संविधान को बर्बाद करने से रोकेगा।

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