हयात ज़फर हाशमी..! कानपुर हिंसा के कथित मुख्य आरोपी की पूरी कहानी

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हयात ज़फर हाशमी..! उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में नई सड़क इलाक़े में दो समुदाए के बीच हुई हिंसा के बाद से हयात ज़फर हाशमी (Hayat Zafar Hashmi) का नाम देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कानपुर हिंसा में इस व्यक्ति को मुख्य साज़िशकर्ता बताया गया है। आइये जानते हैं कौन है यह हयात ज़फर हाशमी ?

हयात ज़फर हाशमी (Hayat Zafar Hashmi) कानपुर शहर में मौलाना मोहम्मद अली जौहर फैंस एसोसिएशन (MMA Jauhar Fans Association)  के नाम से एक संस्था चलाता है। संस्था शहरभर में कई तरह के सामाजिक कार्य करती रही है। साथ-साथ अल्पसंख्यक समुदाए को लेकर हर मौक़े पर आवाज़ बुलंद करती रही है।

बीजेपी की प्रवक्ता नूपुर शर्मा के बयान के बाद बिगड़ा माहौल

बीजेपी की प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने पैग़ंबर मोहम्मद को लेकर दिए एक अमर्यादित बयान के विरोध में इस संस्था के 3 जून को बंद का ऐलान किया था। साथ ही 5 जून को जेल भरों आंदोलन का आह्वान किया था। बाद में पुलिस की परमिशन ना मिलने के चलते हयात ज़फर हाशमी ने इस कार्यक्रम को टालने की बात कह दी थी। क्योंकि कानपुर उस दिन देश के राष्ट्रपति सहित यूपी के मुख्यमंत्री एक कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे थे।

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3 जून को जुमे की नमाज़ के बाद अचानक भड़की हिंसा ने पुलिस की नाकामी पर तो कई सवाल खड़े किए हैं। साथ ही पुलिस के कई अधिकारी भी इसमें प्रशासन की बड़ी चूक मान रहे हैं।

कौन है यह हयात ज़फर हाशमी,आइये जानते हैं

कानपुर हिंसा के मुख्य आरोपित के तौर पर पेश किए गए हयात ज़फर हाशमी (Hayat Zafar Hashmi) वर्तमान में चमनगंज इलाक़े में रहता है। सन 2003-04 में बांसमंडी इलाके में बनी इकबाल लाइब्रेरी में यह संस्था मौलाना अली जौहर फैंस असोसिएशन बनाई थी। हयात द्वारा इसको बनाने का मक़सद सामाजिक कार्यों में रुचि लेना और अल्पसंख्य समाज के साथ खड़ा होना तथा उनके मुद्दों को उठाना था।

कुछ वर्ष बाद इकबाल लाइब्रेरी की इमारत ज़र्जर हो गई तो मौलाना मोहम्मद अली जौहर फैंस असोसिएशन को दूसरे इलाकों से संचालित किया जाने लगा। हालही में हुई कानपुर हिंसा मामले में हयात ज़फर हाशमी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 14 दिन की रिमांड मिलने बाद जेल जानकारी जुटाने के लिए जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने उसे कानपुर हिंसा का मास्टरमाइंड बताया है। ज़फर हाशमी का पहले भी विवादों से नाता रहा है।

देखें पुलिस द्वारा दर्ज गंभीर धाराओं दर्ज किए गए केस

कानपुर हिंसा में अब तक कुल 22 लोग गिरफ्तार हुए हैं। सभी पर बेहद ही गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। गैंगेस्टर और NSA  लगाई गई है। संपत्ति ज़ब्त करने का भी आदेश दिया गया है। पुलिस लगातार अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।हयात ज़फर हाशिमी (Hayat Zafar Hashmi) के ऊपर शहर के अलग-अलग थानों में गैंगस्टर और गुंडा एक्ट समेत अब तक 9 मुकदमे दर्ज हैं। सबसे ज्यादा केस सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के मामले में हैं। अधिकांश मुकदमों में हयात पर चार्जशीट लगी है।

कानपुर शहर में कब-कब हुई हिंसा ?

उत्तर प्रदेश का कानपुर शहर वैसे तो एक औद्योगिक नगरी के रूप में जाना-पहचाना जाता है। लेकिन इस शहर की एक पहचान और भी रही है। इसको दंगों का शहर भी कहा जाता रहा है। यहां दंगों का एक बहुत लंबा इतिहास रहा है। कानपुर में हुए दंगों पर नज़र डालेंगे तो आप पाएंगे कि 1927 से लेकर 1931, 1989, 1990, 1991, 1992, 1993, 2001,2003, 2015, 2019, 2022 तक हिंसा का एक लंबा इतिहास रहा है।

बीते 3 जून 2022 को शुक्रवार के दिन को एक बार फिर कानपुर शहर सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में आ गया। भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने एक टीवी डिबेट के दौरान पैग़ंबर मोहम्मद को लेकर एक अमर्यादित टिप्पणी के बाद लोग ख़ासा नाराज़ थे। इसी को लेकर 3 जून को कानपुर के मुस्लिम क्षेत्रों में बंद का ऐलान किया गया था।

कानपुर हिंसा को पुलिस की बड़ी नाकामी माना जा रहा

शुक्रवार की नमाज़ के कुछ लड़को ने नई सड़क पर जाकर हिंदू समुदाए कि दुकानों को बंद करने को कहा। दुकानदारों ने दुकान बंद करने से इंकार कर दिया। इसके बाद दोनों समुदाए एक दूसरे से भिड़ गए। एक दूसरे पर पत्थरबाज़ी शुरू कर दी। देखते ही देखते मामले ने तूल पकड़ लिया।

कई लोग घायल हो गए। इसमें कुछ पुलिसवालों को भी चोटें आईं। अब SIT गठित कर दी गई है,जो पूरा मामले की जांच करेगी। साथ ही पुलिस पर ये भी आरोप लग रहा है कि उसने एक ही समुदाए के लोगों पर एक्शन लिया और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज रही। जबकि हिंसा दोनो ओर से की गई। फिलहाल अभी तक पुलिस ने एक ही समुदाए के लोगों के जेल भेजा है।

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