एमपी के गुना में आदिवासी महिला को ज़िंदा जला दिया, पुलिस से मांगी थी सुरक्षा लेकिन मिली नहीं

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मध्य प्रदेश/ गुना : बीते शनिवार 2 जुलाई को मध्य प्रदेश में गुना के बमोरी के धनोरिया गांव में एक आदिवासी महिला को जिंदा जला दिया गया, इसमें वह 80 फीसदी तक झुलस गई। महिला का नाम रामप्यारी है, वो अपने खेत में थी। आरोपियों ने कथित तौर पर डीजल डालकर उसे आग के हवाले कर दिया। महिला जान बचाने के लिए चिल्लाती रही लेकिन कोई उसे बचाने नहीं आया।

आरोपियो ने इस जघन्य अपराथ का वीडियो भी बनाया। मामला जमीन विवाद का था, महिला के परिवारवालों के पहले से जान के खतरे की आशंका थी। इसलिए पुलिस से सुरक्षा की गुहार भी लगाई थी। लेकिन आदिवासियों को कुछ न समझने वाली पुलिस ने उनकी बात को अनसुना कर दिया और मरने के लिए छोड़ दिया।

आदिवासी महिला को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया जहां से उसे भोपाल रेफर किया गया। रामप्यारी के परिजनों ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट किया है। जांच के चलिए कलेक्टर और एसपी रामप्यारी के गांव पहुंच गए हैं।

क्या है मामला?

पुलिस के मुताबिक रामप्यारी खेत में जली अवस्था में मिली। उनके पति अर्जुन सहरिया जब खेत जा रहे थे, तो उन्होंने अपनी पत्नी को जला हुआ पाया, उसके सारे कपड़े जल गए थे, उसमें से धुंआ निकल रहा था। आरोपी उस समय ट्रैक्टर में बैठकर भाग रहे थे। अर्जुन के मुताबिक यह काम आरोपी प्रताप, हनुमत, श्याम किरार और उनकी पत्नियों ने किया है।

विवाद की वजह साढे 6 बीघा जमीन बताई जा रही है। आरोपियों ने इसपर पिछले एक साल से कब्ज़ा कर रखा था। मई में अर्जुन सहरिया के परिवार को इस जमीन पर कब्ज़ा मिला था। लेकिन शनिवार को आरोपी परिवार जमीन की जुताई करने लगा। यह बात जब रामप्यारी को पता चली तो वह खेत पहुंच गई। तब आरोपियों ने महिला पर डीज़ल डालकर आग लगा दी।

गुना : इस मामले पर राजनीति हुई शुरू

रामप्यारी के पति अर्जुन ने के मुताबिक उन्होंने 23 जून को एसपी को आवेदन दिया था, जिसमें उन्होंने अपनी जान पर खतरा होने की बात कही थी। इससे पहले बमोरी थाने में भी उन्होंने पुलिस से गुहार लगाई थी। फरवरी में आरोपी अर्जुन के साथ मारपीट भी कर चुके थे। इसके बावजूद पुलिस ने अर्जुन के परिवार को सुरक्षा प्रदान नहीं की।

अब जब एक आदिवासी महिला 80 फीसदी जल चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री ने राजनीति शुरु कर दी है तो प्रशासन एक्टिव हो गया है। तमाम आला पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। जबतक मामला ठंडा नहीं होता जांच चलती रहेगी। और कुछ दिन बाद कोई और आदिवासी परिवार होगा जो प्रशासन की बेरुखी की वजह से बर्बाद हो रहा होगा।

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