द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति बनने के बाद उम्मीद है आदिवासी ‘गांगी’ के साथ जो हुआ वो किसी और के साथ नहीं होगा

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देश के ग्रामीण और दूर दराज के इलाकों में आज भी आदिवासी मूलभूत सरकारी सेवाओं के लिए तरस रहे हैं। खासकर स्वास्थ्य सुविधाओं के लेकर स्थिति बेहद ही खराब है। आए दिन हम वीडियो देखते हैं जहां लोगों को अस्पताल से कभी एंबुलेंस नहीं मिलती तो कभी शव को लोग हाथों में लेकर जा रहे होते हैं, तो इलाज नहीं मिलता।

छत्तीसगढ़ के सुकमा में गांगी नाम की आदिवासी महिला को अपने मृत नवजात बच्चे और पति के साथ एंबुलेंस के लिए घंटो इंतेज़ार करना पड़ा। गांगी के पति कर्मा ने बताया कि सोमवार को उनकी पत्नी को लेबर पेन हुआ। वो उन्हें कांकरलंका के सब हेल्थ सेंटर लेकर गए। जहां उन्होंने एक लड़के को जन्म दिया। जब डॉक्टर को पता लगा कि बच्चा ठीक से सांस नहीं ले रहा तो उन्हें डोर्नपाल अस्पताल रेफर किया गया जो गांव से 18 किलोमीटर की दूरी पर है। दोर्नपाल से दंपत्ती को सुकमा अस्पताल रेफर किया गया जो वहां से 35 किलोमीटर दूर है।

सुकमा पहुंचने से पहले गांगी का बच्चा एंबुलेंस में ही दम तोड़ देता है। बच्चे की मौत के बाद एंबुलेंस ड्राईवर दंपत्ती को डोर्नपाल छोड़ देता है। दोनों को दूसरी एंबुलेंस का इंतेज़ार करने के लिए कहा जाता है। अपने मृत बच्चे के साथ दोनों रात के 12 बजे तक इंतेज़ार करते रहते हैं लेकिन कोई उन्हें अपने गांव छोड़ने के लिए नहीं आता।

अगर गांगी के बच्चे को समय पर इलाज मिल जाता तो शायद उसकी मौत नहीं होती। आए दिन मरीज़ों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल दौड़ाया जाता है और उनकी कोई सुध नहीं लेता।

यह हाल है देश के स्वास्थ्य व्यवस्था का जहां एक गरीब आदिवासी को सिस्टम दुख के सबसे बड़ी घड़ी में भी कोई सहानुभूति प्रकट नहीं करता। देश को एक आदिवासी राष्ट्रपति मिलने वाली हैं। उम्मीद करते हैं कि उनके राष्ट्रपति पद पर आसीन होने के बाद देश में आदिवासियों की स्थिति में बदलाव आएगा जैसे रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनने के बाद दलितों के जीवन में आया है।

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