अग्निपथ योजना का बिहार-यूपी में बड़े पैमाने पर विरोध का क्या है कारण ?

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बिहार-यूपी : केंद्र सरकार द्वारा लाई गई अग्निपथ योजना(Agneepath scheme) का देश के कई राज्यों में अभ्यार्थी विरोध कर रहे हैं। विरोध का रूप हिंसक हो जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सबसे अधिक रेलवे की संपत्ति को क्षति पहुंचाई है। ख़बरों के अनुसार 500 करोड़ रूपय से अधिक की संपत्ति का नुकसान (Railways suffered a loss of more than 500 crores) प्रदर्शनकारियों के किया है। बड़े पैमाने पर बिहार-उत्तर प्रदेश में उग्र प्रदर्शन को देखने को मिला। आगज़नी,पत्थरबाज़ी,ट्रेन में आग लगाने समत कई तरह की संत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया।

बिहार ( Bihar) में बड़े पैमाने पर युवा इस अग्निपथ योजना (Agneepath scheme) को लेकर उग्र प्रदर्शन करने लगे। ट्रेन की बोगियों को आग (Train bogies set on fire) लगा दी गई। रेलवे स्टेशनों पर तोड़फोट की गई। देखते ही देखते यूपी में भी उग्र प्रदर्शन शुरू हो गए। इसके साथ ही देश कई अन्य राज्यों में भी अभ्यार्थियों ने सार्वजनिक संपतियों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया। पहले से ही पिछले 6 सालों में देश के रेलवे को करीब 5000 करोड़ के मालभाड़े का नुकसान हो चुका है। वहीं उग्र प्रदर्शन के कारण अब तक रेलवे को 500 करोड़ रुपये ज्यादा की क्षति हुई है।

बिहार-यूपी में बड़े पैमाने पर अग्निपथ के विरोध का क्या कारण है

प्रदर्शनकारियों द्वारा आगज़नी के कारण देश भर में करीब ट्रेन के 100 कोच को नुकसान हुआ है। ट्रेन के एक कोच की अनुमानित कीमत 2 करोड़ के आत-पास होती है। इसके अलावा रेलवे के 7 इंजन भी जले हैं, प्रत्येक इंजन की कीमत तकरीबन 15 करोड़ होती है। रेल ट्रेक और रेलवे स्टेशन को करीब 200 करोड़ का नुकसान का अंदाजा लगाया लगा है। हालांकि इस नुकसान में प्रदर्शन के कारण रद्ध ट्रेनें के यात्रियों को उनका भाड़े और मालभाड़े का नुकसान नहीं जोड़ा गया है। उग्र प्रदर्शन अब भी जारी है। रेलवे ने 500 के करीब ट्रेन कैंसिल कर दी हैं।

पिछले साल रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) की ओर दी गई जानकारी के मुताबिक, 1,67,557 सैनिकों के साथ, उत्तर प्रदेश से सेना में सबसे अधिक जवान हैं। राज्यों की सूची में सबसे ऊपर उत्तर प्रदेश है। पंजाब से सेना के जवानों की संख्या 89,088 है और यह दूसरे नंबर पर है। 87,835 सैनिकों के साथ महाराष्ट्र इस सूची में तीसरे नंबर पर है। वहीं इसके बाद राजस्थान का नंबर आता है जहां सैनिकों की संख्या 79,481 है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अग्निपथ स्कीम को लेकर उत्तर भारत के राज्यों में ही इतने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहा है। अगर आंकड़ों को देखा जाय तो उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान के राज्यों से 50 फीसदी से ज्यादा भर्तियां होती हैं। और यही कारण है कि इन राज्यों में बड़े स्तर पर उग्र प्रदर्शन किया जा रहा है।

इन राज्यों में तेज़ी से बढ़ती बेरोज़गारी और सरकारी नौकरी की चाहत

बिहार-यूपी में छात्रों में सरकारी नौकरी की चाहत और बढ़ती बेरोजगारी की वजह से भी छात्रों के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो गई है। बिहार-यूपी में बेरोज़गारी भी इसका एक बड़ा कारण माना गया है। इसके साथ ही इन युवाओं के गुस्से की एक वजह सेना में भर्ती प्रक्रिया में देरी भी है। वहीं 2020-21 में भर्ती के लिए 97 रैली होनी थीं, लेकिन सिर्फ 47 हो पाईं। इसी तरह 2021-22 में 87 रैली प्लान हुई और सिर्फ 4 का आयोजन हो सका। और किसी में कॉमन एंट्रेंस एग्जाम नहीं हो सका।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों से इन राज्यों में बढ़ती बेरोजगारी की तस्वीर साफ हो जाती है। मई 2020 में हरियाणा में बेरोजगारी दर 24.6 फीसदी, राजस्थान में 22.2 फीसदी, बिहार में 13.3 फीसदी है। जो कि राष्ट्रीय औसत से दो से तीन गुना तक ज्यादा है। यही कारण है कि अभ्यार्थी खासा नाराज़ दिख रहे हैं। अपनी नाराज़गी के चलते वे उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं।

वहीं सेना ने सांझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कल साफ कर दिया कि अग्निपथ स्कीम को किसी भी सूरत में वापस नहीं लिया जाएगा। इस योजना के लिए साल 1989 में रिफॉर्म पर काम शुरू हुआ था। इसके लिए बाहर के देशों की स्टडी की। इसको लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। हिंसा फैला रहे लोग सेना में नहीं आ सकते है। सेना का मतलब अनुशासन होता है। हिंसा करने वालों के लिय यहां जगह नहीं है।

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