मॉब लिंचिंग की शुरूआत कब और कहां से हुई ? ये राज्य अधिक प्राभावित !

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देश में मॉब लिंचिग की बढ़ती घटनाएं क़ानून व्यस्था के लिय चिंता का विषय बनती जा रही हैं। कहीं धर्म के नाम पर तो कहीं चोरी के शक में या अन्य किसी कारण लोग भीग का शिकार होकर जान गंवा देते हैं। आइए जानते है मॉब लिंचिंग की शुरुआत कब और कहा से हुई और आखिर ऐसा क्या कारण जिससे मॉब लिंचिंग के मामलों में इज़ाफा हो रहा?

मॉब लिंचिंग किसे कहते हैं ?

जब किसी व्यक्ति को किसी आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर सज़ा दे दी जाए,जो कि गैर कानूनी है, उसे मॉब लिंचिंग कहते हैं। हम इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि अगर किसी व्यक्ति ने कोई कुकर्म किया है या उस पर झूठा आरोप लगाया गया है। तब भीड़ यह किसी दल के द्वारा उसे पकड़ कर हत्या कर दी जाती है, उसे मॉब लॉचिंग कहते हैं । मॉब अर्थ भीड़ और लीचिंग का मतलब भीड़ द्वारा हत्या।

लीचिंग शब्द का इस्तेमाल आज से नहीं बल्कि काफी पहले से किया जा रहा है। इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई थी। कुछ लोगो का मानना है कि विलियम लिंच या चार्ल्स लिंच ने इसकी शुरुआत की। चार्ल्स लिंच अपनी खुद की अदालत बैठा कर दोषियों को सज़ा देता था ,क्योकि वो कानून को नहीं मानता था। 1782 में चार्ल्स ने लिंचलॉ नाम से इसकी स्थापना की और निर्गो और टोरिस लोगो को अपना निशाना बनाया। इसके बाद से ही इस शब्द का प्रभाव अन्य देशों में दिखने लगा ।

भारत के इन राज्यों में लिंचिंग के मामले अधिक

झारखंड को मॉब लिंचिंग का अड्डाक कहा जाता है और अब तो इसका नाम भी लिंचिंग पैड रख दिया गया है। हाल ही में हुए झारखंड के शाइस्ता खान के मामले से कोई बेखबर नही है जिसके पति को बड़ी ही बेरहमी से भीड़ ने मार डाला । झारखंड़ में लगातार मॉब लीचिंग के मामले बढ़ते ही जा रहे है।

उत्तर प्रदेश में भी मॉब लीचिंग की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं न। 2012 से लेकर 2019 तक 50 से ज्यादा मामले सामने आए है। जिसमे कुछ लोगो को जान गवानी पड़ी। हरियाणा, छत्तीसगढ़ , दिल्ली , राजस्थान और मध्यप्रदेश के साथ देश के अन्य राज्यों में भी लीचिंग के मामले बढ़ रहे है, जोकि आने वाले समय में क़ानून-व्यवस्था के लिय एक गंभीर समस्या बन सकते हैं।

देश में सबसे पलले झारखंड़ इसको लेकर कानून बनाया गया। 2021 में बने लिंचिंग विधेयक के अंतर्गत दोषी पाए जाने वाले को आजीवन कारावास की सजा या 25 लाख का जुर्माने का प्रावधान है। इस बिल के अनुसार धार्मिक , जातिवाद रंगभेद या राजनीतिक जैसे किसी भी मामले में भीड़ द्वारा कोई हिंसा होती है तो उसे इसकी सजा दी जाएगी।

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