Abortion : देश में कब और क्यों बना अबॉर्शन पर क़ानून, क्या है सज़ा का प्रावधान ?

Spread the love

गर्भपात (Abortion) हमेशा से हमारे समाज में एक पाप की तरह देखा जाता रहा है। कई देशों में ये अपराध की श्रेणी में आता है तो कहीं अबॉर्शन को अपराध न मानते हुए इसे पर्सनल चॉइस माना गया। कई देशों में शर्तों के साथ इसको अपराध मुक्त रखा गया। वहीं हाल ही में गर्भपात को लेकर अमेरिकी सुप्रीट कोर्ट के एक फैसले के बाद वहां ज़बरदस्त हंगामा मचा।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने 50 साल पहले दिए एक ऐतिहासिक फैसले में गर्भपात(Abortion)को महिलाओं का संवैधानिक अधिकार क़रार दिया था। अब उस फैसले को पलटते हुए उसने अमरीकी महिलाओं से यह संवैधानिक अधिकार छीन लिया है। जिसके बाद अमेरिका में सड़को पर विरोध जारी है। महिलाएं कोर्ट के इस फैसले को उनकी स्वतंत्रता के खिलाफ बता रही हैं। राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दुखद बताया।आइये आपको आज बताते हैं कि हमारे देश में गर्भपात की क्या स्थिति है। क्यों गर्भपात को लेकर हंगामा मचता है और किस क़ानून के तहत इसको अपराध क्यों बताया गया है।

Medical termination of pregnancy act

भारत सरकार ने 1971 में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट (Medical termination of pregnancy act)  बनाया जिसके अंतर्गत भारत में गर्भपात कानूनी हो गया है और गर्भपात की अनुमति 20 सप्ताह तक की दी गई है। इसके तहत गर्भपात की अनुमति तब भी मिल जाती है जब किसी महिला के जीवन को बचाना हो उसकी शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करनी हो। अनचाहे गर्भपात की स्थिति अधिकतर 16 से 42 साल तक की उम्र की महिलाओं में पाई जाती है ।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (United Nations Population Fund) की स्टेट ऑफ द वर्ल्ड पापुलेशन रिपोर्ट 2022 के अनुसार जोखिम भरे गर्भपात के कारण मृत्यु का ख़तरा अधिक बढ़ जाता है। इसके चलते हर दिन लगभग 8 महिलाओं की मौत हो जाती है। भारत में 67% गर्भपात को ख़तरनाक पाया गया है। एक रिपोर्ट केस फॉर एक्शन इन नेग्रेटेड क्राइसिस ऑफ अनइंटेडेड प्रेग्नेंसी (The case for action in the neglected crisis of unintended pregnancy) में पाया गया है की विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष 121 मिलियन अनचाहा गर्भधारण होते हैं और लगभग प्रतिदिन 331,000  विश्व के 7 देशों में अनचाहा गर्भधारण करने में भारत भी शामिल है।

विश्व में 200 मिलियन से भी अधिक महिलाएं ऐसी हैं जो गर्भ धारण नहीं करना चाहती। वे गर्भनिरोधक से सुरक्षित रहना चाहती हैं और आधुनिक तरीकों का उपयोग नहीं करती हैं। उनमें से 150 मिलियन से भी अधिक ऐसी महिलाएं हैं जो गर्भावस्था से बचने के लिए किसी भी विधि का उपयोग नहीं करती। विश्व स्तर पर प्रति 1000 महिलाओं पर 64 महिलाएं ऐसी हैं जो अनचाहा गर्भ धारण करती हैं और लगभग 6% महिलाएं ऐसी हैं जो हर साल अनचाहा गर्भ अवस्था का सामना करती हैं ।

अनचाहे गर्भावस्था के मामले क्यों बढ़ते जा रहे ?

एक शोध में पाया गया है की 14 से 18 साल तक की लड़कियों में अनचाहे गर्भपात (Abortion) की संख्या बहुत अधिक होती है इसका प्रमुख कारण यह है कि उन्हें इस विषय का ज्ञान नहीं होता है क्योंकि अभी भी भारत में यौन शिक्षा की जानकारी बच्चों को नहीं दी जाती है। जिस कारण से उन्हें इन मुसीबतों का सामना करना पड़ता है और 20 से 40 साल तक की महिलाएं ऐसी है जिन्हें शादीशुदा जीवन में समय चाहिये या फिर और बच्चे नहीं चाहती ।

एक रिपोर्ट के मुताबिक 15 से 18 वर्ष की लड़कियों में गर्भपात से मरने का सबसे अधिक खतरा होता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थय सर्वेक्षण ( National Family Health Survey 4) 2015-16 गर्भपात के आंकड़ों में इस बार के (National Family Health Survey -5) के आकड़ों में 22 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों को मिलाकर 3.5 प्रतिशत की  गिरावट आई है।

भारत में क्या कहता है अबॉर्शन (Abortion) पर बना क़ानून

गर्भपात को लेकर दुनियाभर में अलग-अलग कानून बने हैं। भारत में गर्भपात (Abortion) कराने के लिए प्रग्नेंसी की तय समय सीमा निर्धारित की गई है। अगर कोई महिला उस तह सीमा को पार कर जाती है तो उस स्थिति में अबॉर्शन अपराध माना जाएगा। आइये जानते हैं क्या कहता है क़ानून ?

  • गर्भपात कराने से पहले एक योग्य डॉक्टर की सलाह लेना बेहद ज़रूरी है। फिर प्रिस्क्रिप्शन के मुताबिक ही अबॉर्शन किया जा सकता है।
  • जब भ्रूण 12 हफ्ते से ज्यादा का ना हो। तब गर्भपात कराया जा सकता है। अगर इससे अधिक है तब नहीं कराया जा सकता।
  • खास मामलो में गर्भपात 24 हफ्तों के अंदर भी कराया जा सकता है। इस स्थिति में महिला की जान को खतरा, मांसिक और शारीरिक नुकसान का खतरा बना जाए।
  • अधिकतम अबॉर्शन की सीमा 24 हफ्ते है जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की इजाजत लेना ज़रूरी है। यह गर्भपात खास मामलों में ही कराया जा सकता है।
  • अगर 24 घंटे बीत जाने पर राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड से मंजूरी लेनी ज़रूरी हो जाती है. जिसमें मेडिकल बोर्ड मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर यह फैसला लेता है कि अबॉर्शन जरूरी है या नहीं।
  • नाबालिग रेप पीड़िता के मामले में भी 24 हफ्तों के अंदर अबॉर्शन कराया जा सकता है।

कानून का पालन नहीं करने पर गर्भपात कराने वाली महिला के साथ डॉक्टर भी अपराधी होगा और आईपीसी की धारा 312 के तहत उन्हें सजा दी जाएगा। अपराध करने वाले को तीन साल सज़ा तो वहीं महिला की इजाजत के बगैर गर्भपात (Abortion) पर दोषी को 10 साल तक की सज़ा दी जा सकती है।

Ground Report के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@Gmail.Com पर मेल कर सकते हैं।

Leave a Comment