भारत के किस राज्य में कितने डॉक्टर, कौन सा प्रदेश सबसे आगे ?

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कोरोना महामारी जब भारत में चर्म पर थी। तब देश को जिन चीज़ों की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ी, वो मेडिकल सुविधाएं और डॉक्टर्स थे। देश का स्वास्थ विभाग कोरोना के आगे बेबस होकर बिखर गया था। लोग इलाज के अभाव में सड़क,चौराहों और घरों पर ही मर गए। किसी को दवा नहीं मिली। तो किसी को आक्सीजन। किसी को अस्पताल में बेड में नहीं मिल सका। तो कोई एम्बुलेंस के इंतज़ार करता रह गया।

भारत देश में वर्तमान समय में 12 लाख 89 हज़ार रजिस्टर्ड डॉक्टर्स हैं और जिनमें से इस पेशे में जुटे हुए डॉक्टर की संख्या 10 लाख 31 हज़ार है। इसका मतलब है कि देश में कुल रजिस्टर्ड डॉक्टर 80 फ़ीसदी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में डॉक्टर और मरीज़ का रेशियो बेहद ही कम है। देश में 1700 प्रति मरीज़ पर 1 डॉक्टर कार्यरत है, जबकि डबल्यूएचयू के अनुसार इसका अनुपात 1:1100 होना चाहिए।

भारत में हर नागरिक पर कितने अस्पताल मौजूद हैं ?

भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) के अनुसार अभी तक जो आंकड़ा है 2031 तक भी यह WHO के आंकड़ो को पूरा नहीं कर सकता। एक सर्वे के मुताबिक हर 61 नागरिकों के लिए देश में 1 सरकारी अस्पताल है और रजिस्टर्ड एलोपैथिक डॉक्टरों के अलावा देश में 7.37 लाख आयुष डॉक्टर ,1.55 लाख डेंटल सर्जन , 26 लाख नर्स और 6.64 लाख फार्मिस्ट मौजूद हैं। जो भारत की आबादी के मुताबिक बेदह ही कम है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में उत्तर प्रदेश में 9 मेडिकल कॉलेजों का लोकार्पण किया और इस दौरान उन्होंने बताया कि सरकार लगातार प्रयास कर रही है की 70 वर्षों में जितने डॉक्टर पढ़ लिख कर निकले हैं उनसे कहीं ज्यादा हम अगले 10 से 12 वर्षों में तैयार कर सकेंगे 2014 के पहले हमारे देश में मेडिकल की सीटें 90 हजार से भी कम थी और बीते 7 वर्षों में देश में मेडिकल की 60 हजार नई सीटें जोड़ी गई हैं।

तो क्या मेडिकल कॉलेजों की सीटें बढ़ाने से हमारी आने वाली जरूरतों को सरकार पूरा कर पाएगी। सरकार के अनुसार 2020 तक देश में 12.55 लाख एलोपैथिक डॉक्टर रजिस्टर्ड थे जिसमें से 10 लाख के करीब अपनी सर्विसेज दे रहे है।

स्कूल ऑफ मैनेजमेंट द्वारा 2014 से लेकर 2030 तक जो रिपोर्ट सरकार ने तैयार करी है उसके लिए 20.7 लाख रजिस्टर्ड डॉक्टर की जरूरत होगी और अभी तक भारत में प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों की संख्या को देखते हुए 2030 तक 14.76 लाख प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों की ज़रूरत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि भारत में डॉक्टर्स की भारी कमी है।

भारत के किस राज्य में कितने डॉक्टर

हाल ही में एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पंजाब और गोवा में डॉक्टरों की संख्या ज्यादा है। जोकि डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक सही नहीं है क्योंकि डब्ल्यूएचओ के अनुसार हजार लोगों पर एक डॉक्टर होना बेहद ज़रूरी है और भारत के ऐसे 6 राज्यों में ऐसा नहीं है बावजूद इसके कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं डॉक्टर ,एलोपैथिक डॉक्टर, मेडिकल ट्रीटमेंट ,दवाइयां ग्रामीण इलाकों के आबादी के मुताबिक सही नहीं है।

देश में बहुत से ऐसे राज्य हैं जिनमें डॉक्टर किसी भी ऐसे राज्य में ट्रांसफर लेने कों तैयार नहीं है जहां पर डॉक्टर की भारी कमी है तो ऐसे में भारत में किस तरह सभी राज्यों में हर हजार लोगों पर एक डॉक्टर संभव हो पाएंगे। चलिए आपको बताते हैं कि भारत के किस राज्य में डॉक्टर की संख्या सबसे अधिक है और किस राज्य में सबसे कम डॉक्टर्स की संख्या है।

2019 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक केरला में हर 10 हजार लोगों पर 42 डॉक्टर्स हैं , जबकि जम्मू और कश्मीर में 10 हजार लोगों पर 21 डॉक्टर कार्यरत हैं, वेस्ट बंगाल और तमिलनाडु में 12 से 15 डॉक्टर 10 हजार लोगों पर मौजूद हैं।

आपको बता दें कि राजस्थान ,असम ,उड़ीसा हिमाचल प्रदेश, पंजाब और सबसे कम झारखंड में डॉक्टर की संख्या है झारखंड में हर 10 हजार लोगों पर सिर्फ 4 डॉक्टर्स कार्यरत हैं जो की बहुत ही चिंताजनक है। अब देखते हैं की सरकार की आने वाली योजनाओं के चलते भारत की आबादी के मुताबिक डॉक्टरों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती है या नहीं।

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