कौन हैं द्रौपदी मुर्मू जिनका राष्ट्रपति बनना लगभग तय माना जा रहा ?

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लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम अब लग गया है। भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। अगर वो चुनाव जीतने में कामयाब रहीं तो देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति होंगी। द्रौपदी मुर्मू झारखंड की राज्यपाल रह चुकीं हैं। द्रौपदी मुर्मू ओडिशा से आनेवाली आदिवासी नेता हैं। राष्ट्रपति चुनाव के लिए 18 जुलाई को मतदान और 21 जुलाई को मतगणना होगी।

कौन हैं द्रौपदी मुर्मू जिनको राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना गया

द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में 20 जून 1958 को जन्मीं। उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू है। द्रौपदी मुर्मू का विवाह श्याम चरण मुर्मू से दंपति के दो बेटे और एक बेटी हुई। लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही उन्होंने पति और अपने दोनों बेटों को खो दिया। घर चलाने और बेटी को पढ़ाने के लिए मुर्मू ने एक टीचर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और फिर उन्होंने ओडिशा के सिंचाई विभाग में एक कनिष्ठ सहायक यानी क्लर्क के पद भी नौकरी की। उन्हें 2007 में ओडिशा विधानसभा द्वारा सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में करीब 20 नामों पर लंबी चर्चा के बाद द्रौपदी मुर्मू के नाम पर सहमति बन गई। ऐसे में अगर द्रौपदी मुर्मू चुनाव में जीत गईं तो देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति होंगी। मुर्मू ओडिशा के रायरंगपुर से विधायक रह चुकी हैं। वह पहली ओडिया नेता हैं जिन्हें राज्यपाल बनाया गया। इससे पहले BJP-BJD गठबंधन सरकार में साल 2002 से 2004 तक वह मंत्री भी रह चुकी हैं। वह आदिवासी संथाल परिवार से ताल्लुक रखती हैं। मुर्मू 1997 में रायरंगपुर नगरपंचायत का कौंसिलर भी रह चुकी हैं।

द्रौपदी मुर्मू की मदद से लोकसभा चुनाव पर नज़र

द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर भाजपा की नज़र आगामी लोकसभा की 60 सीटों पर है। देश में लोकसभा की 543 सीटों में से 47 सीट ST श्रेणी के लिए आरक्षित हैं। इन 60 से अधिक सीटों पर आदिवासी समुदाय का अधिक प्रभाव है। मध्य प्रदेश, गुजरात, झारखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में आदिवासी वोटर निर्णायक स्थिति में हैं।

गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अगले डेढ़ साल के भीतर विधानसभा चुनाव होंगे। ऐसा कहा जा रहा है कि द्रौपदी मुर्मू अगर राष्ट्रपति बन जाती हैं तो इसका सीधा भाजपा को इन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिलने की संभावना जताई जा रही है। देश में अब तक आदिवासी समुदाय का कोई व्यक्ति राष्ट्रपति नहीं बन पाया है।

वहीं विपक्ष ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता यशवंत सिन्हा को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तय किया है। इसके बाद सिन्हा ने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। कई दिनों से विपक्ष को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी नहीं मिल रहा था।

क्या कभी विपक्ष का उम्मीदवार राष्ट्रपति चुनाव जीता है

वैसे तो हमेशा सत्ता पक्ष का ही उम्मीदवार राष्ट्रपति बनता है लेकिन साल 1969 में विपक्ष का उम्मीदवार चुनाव जीत गया था। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि सत्ता पक्ष के लोगों का वोट दो उम्मीदवारों में विभाजित हो गया था। इस बार माना जा रहा है कि अगर सारा विपक्ष एक उम्मीदवार के पक्ष में वोट कर दे और वोट विभाजित न हो तो विपक्ष अपना उम्मीदवार जिताने में कामयाब हो सकता है।

देश के चौथे राष्‍ट्रपति वीवी गिरी इसका अपवाद थे। 1969 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में ये सत्‍ताधारी कांग्रेस के उम्मीदवार नीलम संजीव रेड्डी को पिछाड कर निर्दलीय राष्ट्रपति बने थे। हालांकि कांग्रेस में बटवारे और गुटबंदी के चलते इन्‍हें इंदिरा गांधी ने ही जिताया था।

लेकिन ऐसा विपक्ष का एकजुट होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। माना जा रहा है कि विपक्ष की कुछ पार्टियां भाजपा का समर्थन कर सकती हैं। लेकिन फिर भी इस बार का मुकाबल दिलचस्प होता दिख रहा है।  भारत में अगले राष्ट्रपति पद का चुनाव जुलाई 18 को होना है जिसके नतीजे 21 जुलाई को घोषित होंगे।

राष्ट्रपति चुनाव में क्या होता है वोट वैल्यू का मतलब ?

देश में राष्ट्रपति चुनाव में लगभग 4800 के आस-पास लोग हिस्सा लेते हैं। लेकिन जब वोटिंग के बाद इसका रिज़ल्ट गिना जाता है तब वोटों की संख्या लाखों में हो जाती है। अब आप सोचेंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है ?  दरअसल राष्ट्रपति चुनाव में हर वोट की वैल्यू एक नहीं होती। इसमें हर राज्य के विधायकों और सांसदों की वोट वैल्यू अलग-अलग होती है। कैसे होती है काउंटिंग ? आइये समझते हैं।

राष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग के बाद विधायक औ सांसद के वोट का मूल्य अलग-अलग तरीकों से निकाला जाता है। विधायक के वोट का मूल्य निकालने के लिय उस राज्य की कुल जनसंख्या का कुल विधायकों की संख्या से भाग दिया जाता है। फिर उस संख्या में 1000 का भाग किया जाता है। इसका जो नतीजा निकलेगा। वो विधायकत वोट वैल्यू होगा। इसी तरीक़े से सांसदों के वोट वैल्यू को निकाला जाता है।

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