कौन है इम्तियाज़ अली जिसने की है नुपुर शर्मा को फांसी की सज़ा देने की मांग?

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इम्तियाज़ अली ओवैसी की पार्टी AIMIM के औरंगाबाद से सांसद हैं उन्होंने भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा को फांसी की सज़ा देने की मांग की है। मीडिया को संबोधित करते हुए इम्तियाज़ अलि ने कहा कि इस्लाम अमन पसंद धर्म है और नुपुर शर्मा के लिए कैपिटल पनिश्मेंट की मांग करता है। जलील ने यह बयान महाराष्ट्र के डिविज़नल कमिश्नर के घर के बाहर हो रहे प्रदर्शन के वक्त दिया।

देश भर में नुपुर शर्मा के बयान के बाद हंगामा है, की जगह दंगों जैसी स्थिति बनी हुई है। लगातार मुसलमान समुदाय के लोग नुपुर शर्मा के खिलाफ गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

इम्तियाज़ जलील का कहना है कि कानून को अपना काम करना चाहिए और नुपुर शर्मा को सख्त से सख्त सज़ा देनी चाहिए, पार्टी से निष्कासित कर देने भर से काम नहीं चलेगा। नुपुर शर्मा को ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए जिससे आने वाले समय में कोई ऐसी गलती न कर सके।

कौन हैं इम्तियाज़ अली क्या है उनका एनडीटीवी कनेक्शन?

इम्तियाज़ जलील महाराष्ट्र के औरंगाबाद से सांसद हैं। 2019 के चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने उन्हें इस सीट से मैदान में उतारा था। वो AIMIM के महाराष्ट्र अध्यक्ष भी हैं।

इम्तियाज़ का जन्म औरंगाबाद में ही हुआ। उनके पिता सिविल सर्जन थे और भाई जेट एयरवेज़ में मैनेजर हैं।

जलील ने बाबसाहेब अम्बेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में ग्रैजुएशन और बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स किया है।

इम्तिज़ाय जलील लोकमत समाचार और एनडीटीवी न्यूज़ चैनल के साथ भी पत्रकार के रुप में काम कर चुके हैं। 2014 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 22 दिन चुनावी प्रचार कर मौजूदा शिव सेना सांसद को पहली बार में ही हरा दिया था।

इम्तियाज़ जलील की लीडरशिप में औरंगाबाद में ओवैसी की पार्टी का खूब विकास हुआ है। यहां के स्थानीय चुनाव में जलील की मदद से पार्टी को 25 सीटें नगरनिगम चुनाव में हासिल हुई।

नुपुर शर्मा के लिए कैपिटल पनिष्मेंट की मांग के बाद से सोशल मीडिया पर लोग न्यूज़ चैनल एनडीटीवी को भी टार्गेट कर रहे हैं। आपको बता दें कि जलील ने एनडीटीवी के साथ बेहद ही कम समय के लिए काम किया था। और काफी पहले वो चैनल का साथ छोड़ चुके हैं।

आपको बता दें कि भारत में दिन रात हिंदू और मुसलमान एक दूसरे के भगवानों के खिलाफ आपत्तीजनक टिप्पणी करते हैं। इसके लिए कानूनी प्रावधान हैं, जिसके तहत कार्रवाई होती है। लेकिन एक टिप्पणी के लिए कैपिटल पनिष्मेंट की मांग करना भारत में बोलने की आज़ादी पर प्रहार होगा।

ज़रुरत है तो सहिष्णुता की। चैनलों को चाहिए कि वो केवल जिम्मेदार लोगों को ही अपनी डिबेट में बुलाएं। हाल ही में आजतक के एक न्यूज़ डिबेट में साध्वी पूजा पांडे को बुलाया गया। ये वही हैं जिनका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें महात्मा गांधी के पुतले पर गोली चलाती दिखी थी। क्या चैनल को इनके बारे में नहीं पता था? ऐसे लोगों को चैनल पर बुलाकर आज तक जैसा देश का सबसे बड़ा चैनल क्या बताना चाहता है।

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