देश में नूपुर शर्मा के विरोध पर गिरफ़्तारियाँ और अरब में विरोध पर तुरंत ऐक्शन, ऐसा क्यों?

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भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही दिल्ली बीजेपी के मीडिया प्रभारी नवीन जिंदल को भी पार्टी से निकाल दिया गया। एक अंग्रेज़ी न्यूज़ चैनल पर डिबेट के दौरान नूपुर शर्मा ने पैगंबर मोहम्मद पर बेहद ही अमर्यादित टिप्पणी की थी। वहीं नवीन जिंदल ने ट्विटर पर पैगंबर को लेकर अपशब्द लिखे थे।

बीजेपी द्वारा उठाए गए इस क़दम के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के सवाल तैर रहे हैं। न्यूज़ चैनलों पर भी इसको लेकर बहस जारी है। लोग सवाल कर रहे हैं कि नूपुर शर्मा द्वारा पैगंबर को लेकर की गई ग़लत टिप्पणी के बाद देशभर में जब मुस्लिम समुदाए ने विरोध किया तब पार्टी ने किसी तरह का कोई एक्शन नहीं लिया। देश के अलग-अलग शहरों में नूपुर शर्मा के ख़िलाफ FIR भी दर्ज हुई। लेकिन उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई।

नूपुर शर्मा के विरोध पर गिरफ़्तारियाँ,NSA और गैंगेस्टर एक्ट में कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के कानपुर में नूपुर शर्मा के बयान को लेकर निकले विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा हो गई। एक ही समुदाए के 36 लोगों पर पुलिस ने NSA, गैंगेस्टर जैसे संगील मामले दर्द करके उन्हें जेल भेज दिया। 1000 अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज कर लिया गया। लोगों की संपत्ति ज़ब्त करने के आदेश दे दिए गए।

पूरा कानुर शहर दंगे की चपेट में आने से बच गया। हैरत की बात ये रही कि इतना सबकुछ हो जाने के बाद भी पुलिस ने नूपुर शर्मा को गिरफ्तार तक नहीं किया और न ही बीजेपा ने कोई एक्शन लिया। पुलिस अब विरोध करने वाले के गली चौराहों पर पोस्टर टांग रही है।

नूपुर शर्मा को मिला पार्टी के शीर्ष नेताओं समेत पीएमओ का समर्थन

नूपुर शर्मा ने ऑप इंडिया नामक एक वेबसाइट को दिए साक्षात्कार के दौरान बताया कि उनके इस बयान के बाद पार्टी के सभी शीर्ष नेताओं ने उनके साथ खड़े होने की बात कई। यहां तक की गृह मंत्रालय और पीएमओ ने उनको समर्थन देते हुए उनके साथ खड़ा होने की बात कही। लेकिन फिर अचानक उनको पार्टी ने निलंबित कर दिया। उनके साथ ही नवीन जिंदल को भी पार्टी से बाहर कर दिया गया।

पैगंबर मोहम्मद को लेकर दिए गए बयान के बाद अरब के देशों में बवाल मच गया। अरब के मुल्को में ट्विटर पर भारतीय प्रोडक्ट्स के बहिष्कार की मांग को लेकर ट्रेड शुरू हो गए। ये ट्रेंड लगातार दो दिन तक चले। इसके साथ ही अगर देशों के जाने-माने लोग भी नाराज़गी ज़ाहिर करने लगे। फिर क़तर ने भारतीय राजदूत को इस संबंध में तलब करते हुए नाराज़गी ज़ाहिर की और भारत सरकार से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने को कहा।

भारतीय विदेश मंत्रालय को एक आधिकारिक बयान जारी दी सफाई

भारतीय विदेश मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान जारी कर में कहा, “भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने क़तर सरकार को बताया है कि ये ट्वीट किसी भी तरह से भारत सरकार के विचार को प्रदर्शित नहीं करते, ये फ़्रिंज लोगों के विचार है। इस तरह के विवादित बयान देने वालों पर कार्रवाई की जा चुकी है।”

वहीं ये सिलसिला यहीं नहीं रुका। क़तर के बाद कुवैत,ईरान,सऊदी अरब,पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने भी नाराज़गी जताई। इसके साथ ही पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के नए-नवेले प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने भी अपना रोष जताया। अब दुनियाभर में इस घटना को लेकर चर्चा होना शुरू हो गई।

इन देशों ने दर्ज कराई अपनी नाराज़गी

https://twitter.com/KSAmofaEN/status/1533546583874277377?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1533546583874277377%7Ctwgr%5E%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.bbc.com%2Fhindi%2Findia-61701514

भारी विरोध के बाद दोनों ने माफी मांगते हुए अपने बयान लिए वापस

नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल ने माफी मांगते हुए अपने शब्द वापस लेने की बात कह दी। लेकिन शायद अब बहुत देर हो चुकी थी। मामला हाथ से निकल गया। सोशल मीडिया पर लोगों ने भारत की छवि को दुनियाभर में धूमिल करने का आरोप भी इन्हीं नेताओं पर लगाया। साथ ही बीजेपी पर तुंरत एक्शन ना लेके को भी इसका ज़िम्मेदार बताया।

अब लोग लगातार सवाल कर रहे हैं कि भारतीय मुसलमानों ने जब तक विरोध किया तब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया। जब खाड़ी के देश खुलकर सामने आए तब ऐसा क्यों किया गया ?

इसी को लेकर सोशल मीडिया पर एक यूज़र क़मर वहीद नक़वी ने ट्विट कर लिखा- अगर देशों में प्रतिक्रिया न होती तो बीजेपी शायद ही अपने प्रवक्ताओं के ख़िलाफ कार्रवाई करने की सोचती। बीजेपी को समझना चाहिए कि भारतीय मुसलमान भारत के हैं। वे किसी मुल्क का मुंह नहीं ताकते। बीजेपी ऐसे ग़लत संकेत क्यों दे रही है कि भारतीय मुसलमान अरब की ओर देखें ?

खाड़ी के देशों से भारत के आर्थिक रिश्ते हमेशा रहे है मज़बूत

खाड़ी के देशों के भारत का रिश्ता हमेशा के दोस्ताना रहा है। अरब देशों ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के मुकाबले भारत को हमेशा आगे रखा है। वहीं इन मुल्कों से आर्थिक जुड़ाओ की जड़े भी बहुत गहरी रही हैं।

एक अनुमान के मुताबिक भारतीय समुदाय के 80 लाख से ज़्यादा लोग खाड़ी देशों में रहते हैं। इतनी बड़ी संख्या में इस क्षेत्र में बसे भारतीयों के कारण भारत के खाड़ी देशों से बेहतर सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रिश्ते ज़रूरत रहे हैं और समय के साथ मज़बूत होते गए हैं।

खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय से कितनी विदेशी मुद्रा मिलती है? एक रिपोर्ट के मुताबिक,  सऊदी अरब से 11.2 अरब डॉलर, कुवैत से 4.6, कतर से 4.1, ओमान से 3.3 और यूएई से 13.8 अरब डॉलर भारत भेजे जाते हैं।

अब अगर ऐसे में इन देशों से रिश्ते खराब होते हैं तो भारतीय कामगारों को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। भारत को भी आर्थिक तौर पर भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।

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