शिया मुस्लिमों के ख़िलाफ़ लद्दाख में बौद्ध भिक्षु एकजुट होकर सड़कों पर क्यों निकले?

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ख़ूबसूरत पहाड़ियों वाला लद्दाख (Laddakh) आजकल सांप्रदायिकता की चपेट में है। इस केंद्र शासित राज्य में अचानक से तनाव बढ़ गया है। यहां एक बौद्ध भिक्षु द्वारा निकाले गए मार्च के बाद राज्य में सांप्रदायिक तनाव बना हुआ है। बौद्ध साधु, (Buddhists) शिया मुस्लिम बहुल क्षेत्र कारगिल (Kargil) में बौद्धों का धर्म स्थल गोंपा (Buddhist Monestry Gompa) बनाना चाहते हैं। इसी को लेकर 21 मई बौद्ध साधु (Buddhist Monk)  द्वारा निकाला गया मार्च जो 14 जून को कारगिल में पहुंचकर समात्त होना है। इसी कारण इन दो समुदाए के बीच तनाव पैदा हो गया है।

कारगिल एक शिया मुस्लिम बहुल क्षेत्र (Shia Muslim-dominated Kargil) है जहां बौधगुरु चोस्कयोंग पालगा रिनपोछे बौद्धों का धर्म स्थल गोंपा की स्थापना करना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से बौद्धगुरू चोस्कयोंग (Choskyeong Palga Rinpoche)  ने अपने अनुयायियों के साथ कारगिल में उस स्थान पर नींव रखने के लिए 1000 लोगों के साथ यात्रा शुरू की। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय के बौद्ध गुरू के इस फैसले पर नाराज़गी ज़ाहिर कर चुका है। इसके साथ ही शांति भंग होने की बात कही है।

लद्दाख में बौद्ध भिक्षु मुस्लिमों के खिलाफ विरोध क्यों रहे

हमेशा शांत रहने वाला लद्दाख यहां बौद्ध भिक्षुओं की इस यात्रा के बाद से सांप्रदायिकता की चपेट की ओर बढ़ रहा है। लेह एक बौद्ध बहुल क्षेत्र है। यहां के बौद्ध समुदाय का कहना है कि कारगिल के मुख्य बज़ार में साल 1961 में बुद्ध की एक गोंपा थी। कारगिल में रहने वाले बौद्ध समुदाय के लिए इस इलाके में गोंपा के निर्माण की इजाज़त थी, लेकिन 1969 में बचे हुए बौद्धों की मौत के बाद इसका निर्माण नहीं हो सका।

अब पचास साल का समय बीत जाने के बाद बौद्ध समुदाय के लोगों ने फिर से इस मठ यानि गोंपा को बनाने के लिए आंदोलन शुरू कर दिया है। लेह से कारगिल के लिय निकाले गए इस मार्च के बाद से शिया मुस्लिम और बौद्ध समुदाय के लोगों के बीच दूरी बन रही है। तेज़ी से माहौल तनावपूर्ण स्थिति की तरफ बढ़ रहा है। 14 जून को यात्रा उस कारगिल के उस स्थान पर पहुंचना है जहां बौद्ध समुदाए अपना धार्मिक स्थल बनाने की मांग पर अड़ा है।

कारगिल में शिया मुस्लिमों ने पुलिस प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

कारगिल में प्रशासन और पुलिस ने इस स्थिति से निपटने के लिए कमर कस ली है और पुलिस को स्थिति से निपटने के लिए कहा गया है। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन बौद्ध प्रदर्शनकारियों को समर्थन दे रहा है। कारगिल क्षेत्र में शांति भंग करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस प्रशासन को इस मार्च को रोक देना चाहिए। लेकिन पुलिस ऐसा नहीं कर रही। मार्च मं लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

हालही में कुछ दिन पहले बौद्धों के धर्मस्थल बनाने की मांग करते हुए लेह से कारगिल के लिए निकली एक यात्रा के विरोध में कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस मैदान में उतर गया था। स्थानीय शिया मुस्लिम बहुल इस संगठन ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी थी कि अगर इस मार्च को कारगिल आने से रोका नहीं गया तो हालात बिगड़ना तय है। इसके लिए कारगिल प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। बाद में ये मार्च रोक दिया गया था। अब एक बार फिर मार्च सड़कों पर है।

बौद्धों का धार्मिक स्थल गौंपा क्या होता है

बौद्धों का गोम्पा, गोम्बा, गोन्पा या गोंपा बोला जाने वाला तिब्बती शैली में बने एक प्रकार के बौद्ध-मठ के भवन या भवनों के समूह को कहते हैं।  तिब्बत, भूटान, नेपाल और उत्तर भारत के लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पूर्वोत्तर के सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में यह कई जगहों पर बनाए गए हैं। सभी बौद्ध इसे अपने धार्मिक स्थल की तरह पूजते हैं।

मज़बूत दिवारों और द्वारों से घिरे यह धार्मिक भवन साधना, पूजा, धार्मिक शिक्षा और भिक्षुओं के निवास के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इसके केंद्र में महात्मा बुद्ध की मूर्ति या उन्हें दर्शाने वाली थांका चित्रकला होती है। गोंपा किसी शहर या बस्ती के पास किसी बुलंद पहाड़ या चट्टान पर बनाए जाते हैं।

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