योगी सरकार यूपी में मुस्लिम मदरसों का ‘जबरन सर्वे’ क्यों करा रही?

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राज्य के सभी मदरसों का सर्वे करा रही है। विरोध के बावजूद भी योगी सरकार ने सभी मदरसों के सर्वेक्षण के प्रमुख बिंदुओं को साफ कर दिया है। मौलाना मदनी और ओवैसी के लगातार विरोध के बाद भी सरकार नहीं रुकी और अधिकारी मदरसों के सर्वेक्षण में जुट गए हैं। सवाल उठ रहा है कि जबरन मदरसों के सर्वे के पीछे सरकार की मंशा क्या है ?

योगी सरकार की ओर से मदरसों के सर्वोक्षण के लिय जारी किए गए फॉर्मेट में 12 बिंदु तय किए गए हैं। योगी सरकार के इस जबरिया मदरसों के सर्वे का लगातार विरोध जारी है। लेकिन सरकार तो बस अपनी ज़िद पर अड़ी है। मदनी से लेकर ओवैसी तक इस मामले पर सरकार पर हमलावर हैं। योगी सरकार मुस्लिमों के मामले में इतनी आसानी से पीछे नहीं हटती।

योगी सरकार मदरसों का सर्वे क्यों करा रही ?

वहीं, इस सबके बीच योगी सरकार के मंत्री दानिश अंसारी ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि योगी सरकार का एक मात्र मक़सद मदरसों को मुख्य धारा से जोड़ना है। हमारी सरकार मदरसों को शिक्षा के आधुनिक तरीकों से जोड़ने की अगर कवायद कर रही है तो इसमें किसी को परेशानी क्या हो सकती है। मदरसों और वहां पढ़ने वाले छात्रों के लिय मदरसों का सर्वेक्षण करना ज़रूरी है।

यूपी सरकार ने प्रदेश में सभी मदरसों की जांच कर रिपोर्ट के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए। 31 अगस्त को प्रदेश में चलने वाले सभी गैर मान्यता प्राप्त निजी मदरसों का सर्वेक्षण करने का आदेश योगी सरकार ने जारी कर दिया। अब पूरे प्रदेश में यही टीम मदरसों की स्थिति का सर्वे करेगी। सरकार के दिशा-निर्देश के मुताबिक, गठित टीमों को 15 अक्टूबर तक मदरसों का सर्वे पूरा कर लेना है। ये टीमें 25 अक्टूबर तक अपनी सर्वे रिपोर्ट सरकार को सौंप देंगी।

सरकार मदरसों के किन 12 बिंदुओं पर सर्वे कर रही

मदरसे का नाम, मदरसे को चलाने वाली संस्था का नाम, मदरसे के स्थापना वर्ष की जानकारी, मदरसा निजी भवन में चल रहा है या किराए के भवन में, मदरसे का भवन सुरक्षित है या नहीं। पेयजल, फर्नीचर, बिजली की व्यवस्था, शौचालय आदि सुविधाओं के बारे में जानकारी, मदरसे में पढ़ रहे छात्र- छात्राओं की कुल संख्या की जानकारी देनी होगी, मदरसे में कुल शिक्षकों की संख्या, मदरसे में लागू पाठ्यक्रम क्या है, मदरसे की आय का स्रोत क्या है, क्या इन मदरसों में पढ़ रहे छात्र-छात्राएं किसी और शिक्षण संस्थान स्कूल में नामांकित हैं, क्या किसी गैर सरकारी संस्था या समूह से मदरसे की संबद्ध है, सर्वेयर तमाम बिंदुओं पर मदरसा संचालकों की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी पर अपनी टिप्पणी देगा।

सरकार की निगाह मदरसों पर टेढ़ी क्यों है

असम सरकार भी मदरसों पर हमलावर है। सरकार का दावा है कि मदरसों से कट्टरता फैलाई जा रही है। असम में सरकार ने मदरसों पर पूरी तरह से शिकंजा कस दिया है। सेम उसी पैटर्न पर योगी सरकार ने भी प्रदेश के मदरसों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सरकार ये काफी समय से ये बताने पर तुली हुई है कि मदरसे आतंक का अड्डा बनते जा रहे हैं।

मुस्लिम समुदाए का आरोप है कि लगातार उनको सताया और सरकारी शक्तियों का ग़लत इस्तेमाल कर उनको डराया जा रहा है। योगी सरकार एक समुदाए को खुश रखने के लिय दूसरे समुदाए पर किसी न किसी बहाने से ज़ुल्म और अत्याचार करने से ज़रा भी नहीं चूक रहे हैं। शासन-प्रशासन अपनी शक्तियों का ग़लत इस्तेमाल कर रहा है। हमको हर ओर से दबाया और डराया जा रहा है।

सिर्फ़ मदरसों का ही सर्वे क्यो

जमीयत उलेमा-ए- हिंद के चीफ अरशद मदानी ने योगी सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं। वो कहते है कि कुछ सांप्रदायिक ताकतों ने देश में नफरत फैलाने का काम कर रही हैं। देश में जितने भी मदरसे चल रहे हैं, वो संविधान के हिसाब से काम करते हैं। लेकिन कुछ ताकतें इन्हें खत्म करने की नीयत से काम कर रही है।

सरकार ने योगी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि केवल मदरसों का ही सर्वे क्यों किया जा रहा है? असर सरकार की मंशा इनका विकास से है तो केवल मदरसों का ही क्यों? वहीं मौलाना मदानी ने ये भी कहा है कि अगर सरकार सिर्फ इतना जानना चाहती है कि कौन इन मदरसों को रन कर रहा है, किस किस ज]मीन पर इन्हें बनाया गया है, ऐसी तमाम जानकारी देने में किसी को कोई परहेज़ नहीं है।

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