World population day :  भारत दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश कब बन जाएगा?

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World population day : देश में लगातार बढ़ती आबादी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। यह समस्या भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया झेल रही है। भारत में बढ़ती जनसंख्या सीमित संसाधनों पर टिकी है। देश में खाद्यान संकट, पर्यावरण प्रदूषण, रोजगार संकट, शिक्षा का अभाव और महंगाई जैसी समस्याएं पैदा कर रही है। आगे चलकर ये एक बड़ी चुनौती का रूप ले सकती हैं। इस बढ़ती आबादी की समस्या से निपटने और इस पर नियंत्रण पाने के लिए 11 जुलाई 1989 को “विश्व जनसंख्या दिवस” के आयोजन की शुरुआत हुई।

विश्व जनसंख्या दिवस पर भारत में लगातार बढ़ती आबादी चिंता का सबसे बड़ा कारण बनती जा रही है। भारत के पास दुनिया का सिर्फ 2.4 प्रतिशत भूभाग है।  दुनिया की 18 प्रतिशत आबादी भारत में रहती है। 2001 और 2011 की जनगणना के बीच आंकड़ो बताते हैं कि देश में करीब 18 प्रतिशत जनसंख्या बढ़ी है।

World population day : बढ़ती आबादी देश के लिय ख़तरा क्यों

अगर भारत की आबादी इसी दर से बढ़ती रही, तो 2027 के आसपास भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। संयुक्त राष्ट्र के एक रिपोर्ट जारी कर ऐसा अनुमान जताते हुए भारत के लिय ख़तरा भी बताया।

रिपोर्ट के मुताबिक अगर ऐसा हुआ तो देश में बड़े पैमाने पर खाने का संकट, जल सकंट, चिकित्सा और स्वास्थ्य ,बेरोजगारी संकट जैसे संकट खड़े हो सकते हैं। प्राकृतिक का संतुलन बिगड़ा तो भयानक प्राकृतिक आपदाओं का खतरा पैदा हो जाएगा। लोग पलायन, भुखमरी से बेहाल हो जाएगे।

सरकार जनसंख्या कानून क्यों नहीं लाती

देश में सत्ता में बैठे दल और विपक्षी दल और तमाम नेता समय-समय पर जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की बात करते रहे हैं। देश की बढ़ती आबादी को लेकर कई दशक पहले ही चिंता व्यक्त की जाने लगी थी। इंदिरा गांधी के समय से आज पीएम मोदी की सरकार तक ने देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लागू करने की बात पर कोई विचार नहीं किया। लेकिन कई नेता इस क़ानून को लाने की वकालत करते रहते हैं।

देश में जनसंख्या कानून के विरोध में अनेक तर्क गढ़ दिये जाते हैं। देश में अलग-अलग मज़हबों के लोग रहते हैं। समय-समय पर वे लोग इस कानून को उनकी धार्मिक मान्यताओं के विपरीत बताकर विरोध करते आए हैं। फिर इसके बाद राजनीति शुरू हो जाती है।

दुनिया की कुल जनसंख्या जब साल 1987 में 5 अरब के आंकड़े को क्रॉस कर गई थी, तब संयुक्त संघ ने इसपर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। इसके बाद तमाम देशों के सुझाव और सहमति के बाद 11 जुलाई, 1989 को पहली बार विश्व जनसंख्या दिवस मनाया गया। वहीं डेटाबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, यूनाइटेड नेशन्स पॉपुलेशन फंड ने भारत की आबादी को तीन आयु वर्गों में बांटा है।

0-14 वर्ष =25% आबादी है

15-64 वर्ष =68% आबादी है

65+ वर्ष से अधिक =7% आबादी है

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